हिंदू धर्म में पवित्र और बेहद शुभ फल प्राप्त करने वाला व्रत अपरा एकादशी व्रत को मानते हैं। महिमा इस व्रत की अपार होती है। अपरा एकादशी का व्रत उन लोगों के लिए लाभकारी होता है जिनके जीवन में रोग, आर्थिक संकट या फिर किसी भी तरह से उनकी नौकरी में बाधा हो रही है।

हालांकि कठोर नियमों वाला व्रत एकादशी के व्रत को कहते हैं। विशेष तौर पर विधि विधान का एकादशी के व्रत में महत्व माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को विधि विधान से करने से व्यक्ति को फल जल्दी प्राप्त होता है।
अपरा एकादशी व्रत की यह है पूजा और विधि

इस व्रत को जो रखता है वह सुबह उठकर स्नान करने के बाद शुद्धिकरण पूजा के स्थान को करें। उसके बाद पीले वस्त्र भगवान विष्णु को पहनाए साथ ही पुष्प, फल और मिष्ठान का भोग जरूर लगाएं। फिर विष्णु जी की आरती करें।
ये हैं एकादशी व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त

एकादशी व्रत की तिथि का आरंभ 17 मई को दोपहर 12 बजकर 42 मिनट पर होगी और एकादशी व्रत की तिथि 18 मई दोपहर 3 बजकर 8 मिनट तक समाप्त होगी। एकादशी के व्रत के पारण का समय 19 मई सुबह 5 बजकर 28 मिनट से सुबह 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।
एकादशी के व्रत की है यह मान्यता

व्यक्ति के जीवन की हर तरह की बाधा को एकादशी का व्रत दूर करता है। इसके साथ ही मोक्ष प्रदान करने वाला यह व्रत बताया गया है। यह व्रत बेहद उपयोगी है लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए भी।
इन बातों का जरूर ध्यान इन बातों का रखें

यह व्रत कई नियमों से किया जाता है। विशेष तौर पर स्वच्छता और संयम का इस व्रत में ध्यान रखा जाता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति यह व्रत रखता है उसे क्रोध नहीं करना चाहिए और किसी भी जीव की हत्या नहीं करनी चाहिए। शुद्ध विचार मन में रखें। इसके अलावा किसी की बुराई नहीं करनी चाहिए और अपने मन में अहित करने का विचार नहीं करना चाहिए।


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