कद 3 फीट लेकिन हौसले ऊंचे! नहीं मिला एडमिशन तो कानूनी लड़ाई के बाद बने डॉक्टर, जानिए गणेश बरैया के संघर्ष की कहानी

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Doctor Ganesh Baraiya Success Story: अगर हौसला मजबूत हो, तो शारीरिक कद या अन्य कोई बाधा इंसान को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। इस बात के जीवंत मिसाल हैं गुजरात के गणेश बरैया। जिनकी लंबाई तीन फीट है और करीब 20 किलो वजन है। गणेश ड्वार्फिज़्म की वजह से 72 फीसद हैंडीकैप है, लेकिन यह चुनौती उन्हें डॉक्टर बनने से नहीं रोक पाई। कई बार कानून, नियम और लोग रास्ता रोकते रहे, लेकिन गणेश के जज्बा के आगे कोई नहीं टिका। उन्होंने लोगो को विश्वास दिला दिया कि सपनों की ऊंचाई इंसान की ऊंचाई से कई ज्यादा बड़ी होती…

Doctor Ganesh Baraiya Success Story: अगर हौसला मजबूत हो, तो शारीरिक कद या अन्य कोई बाधा इंसान को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। इस बात के जीवंत मिसाल हैं गुजरात के गणेश बरैया। जिनकी लंबाई तीन फीट है और करीब 20 किलो वजन है। गणेश ड्वार्फिज़्म की वजह से 72 फीसद हैंडीकैप है, लेकिन यह चुनौती उन्हें डॉक्टर बनने से नहीं रोक पाई।

कई बार कानून, नियम और लोग रास्ता रोकते रहे, लेकिन गणेश के जज्बा के आगे कोई नहीं टिका। उन्होंने लोगो को विश्वास दिला दिया कि सपनों की ऊंचाई इंसान की ऊंचाई से कई ज्यादा बड़ी होती हैं। आज गणेश उन सभी लोगो के लिए प्रेरणा बन गए हैं, जो मुश्किल परिस्थितियों से हार मानकर पीछे हट जाते हैं। उन्होंने 27 नवंबर से भावनगर में ही मेडिकल अफसर के तौर पर अपनी पहली नौकरी शुरू की है।

Dr. Ganesh Baraiya Kon Hai?: सर्कस वाले खरीदना चाहते थे

गोरखी गांव में एक किसान के घर जन्मे गणेश नौ भाई-बहनों में आठवें नंबर पर हैं। परिवार में वह अकेले हैं, तो ड्वार्फिज्म (बौनापन) के शिकार हैं। बचपन से ही उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, बच्चे उनके कद को लेकर चिढ़ाते थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जब गणेश 10 साल के थे, तब एक सर्कस मंडली ने उन्हें 5 लाख रुपये में ‘खरीदने’ का ऑफर दिया था। उनका कहना था वह सिर्फ सर्कस में ही काम कर सकता है, लेकिन गणेश के पिता ने उन्हें भगा दिया।

पक्का घर बनाने का सपना

गणेश के माता-पिता किसान हैं और वह नौ भाई-बहनों में से एक हैं। उनका परिवार कच्चे मकान में रहता है। गणेश का कहना है कि ‘मेरा सबसे बड़ा सपना अपने परिवार के लिए एक पक्का घर बनाना है। पैसे की कमी के चलते कई बार मकान का निर्माण रुक गया था, लेकिन अब सैलरी मिलने पर मैं इसे पूरा करूंगा।’

Gujarati Dr. Ganesh Baraiya: MBBS के लिए लड़ी कानूनी लड़ाई

Doctor Ganesh Baraiya Success Story
Doctor Ganesh Baraiya Success Story (Image- Social Media)

गणेश का डॉक्टर बनने का सफर आसान नहीं था। उन्हें 2018 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) ने MBBS कोर्स में दाखिला देने से इनकार कर दिया, वजह बताई गई कि उनकी शारीरिक स्थिति उन्हें डॉक्टर का काम करने से रोकेगी। गुजरात हाईकोर्ट ने भी MCI के इस फैसले को सही ठहराया, लेकिन फिर भी गणेश ने हार नहीं मानी और अपने हौसले बुलंद रखे। उनके स्कूल प्रिंसिपल डॉ. दलपतभाई कटारिया ने उनके लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखाया। आर्थिक तंगी के चलते उनके परिवार की कानूनी लड़ाई का खर्च भी प्रिंसिपल कटारिया ही उठा रहे थे।

फिर गणेश ने B.Sc. में एडमिशन लेते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसपर केस दायर करने के चार महीने बाद, सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि लंबाई की वजह से उनका दाखिला नहीं रोका जा सकता। इसके बाद गणेश का मेडिकल की पढ़ाई का रास्ता साफ हुआ।

Doctor Ganesh Baraiya Success Story:  दोस्तों और शिक्षकों ने मदद की

गणेश को 2019 में भावनगर मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल गया। लेकिन उनके क्लास के साथियों और प्रोफेसर्स ने हर कदम पर उनकी मदद की। छोटे कद के कारण मेडिकल लैब में उन्हें परेशानी होती थी। उनके लिए एनाटॉमी क्लास में आगे की सीट रिजर्व करवाई, सर्जरी ट्रेनिंग के दौरान ऑपरेशन टेबल दिखाने में मदद की। गणेश कहते हैं कि ‘मेरे दोस्तों और शिक्षकों ने ये ध्यान रखा कि मेरी लंबाई मेरे सीखने की राह में रोड़ा न बने।’

‘मुझे देखकर मरीज चौंक जाते हैं’

गणेश बताते हैं कि जब मैंने नौकरी करना शुरू किया, तो मरीजों का पहला रिएक्शन हैरानी होता था। मेरी कद-काठी की वजह से लोग चौंक जाते हैं, लेकिन जब मेरे संघर्ष की कहानी सुनते हैं, तो भरोसा करने लगते हैं। मरीज भी मेरे साथ सकारात्मक और सौहार्दता से पेश आते हैं।

डॉ. गणेश के सपने

Doctor Ganesh Baraiya Success Story
Doctor Ganesh Baraiya Success Story (Image- Social Media)

अब आगे गणेश का सपना है, वह पीडियाट्रिक्स, डर्मेटोलॉजी या रेडियोलॉजी में एक्सपर्ट बने। गांव के गरीब लोगों का इलाज करें, जहां सबसे ज्यादा जरूरत है। दुनिया में सबसे छोटे डॉक्टय के खिताब के लिए भी उनके नाम पर विचार हो रहा है। गणेश की ये जीत न सिर्फ उनकी अपनी है, बल्कि हर उस शख्स की है जो शारीरिक चुनौतियों के बावजूद भी बड़े सपने देखते हैं। उनका वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है और लोग उन्हें हौसला दे रहे हैं। डॉ. गणेश ने गुरुवार को मेडिकल ऑफिसर के रूप में अपने जीवन की पहली नौकरी की शुरुआत करने के साथ ही समाज व दिव्यांगों के लिए एक उदाहरण पेश किया।

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Bhawana Rawat

भावना रावत पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम की खबरें लिखने में रुचि है। दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं।