Prayagraj: बजरंगबली को क्यों कहते हैं “प्रयाग का कोतवाल”, कहानी है रहस्यमयी

Summary :

Prayagraj: प्रयागराज के हनुमान मंदिर का रहस्यमयी इतिहास…

प्रयागराज में कई ऐसी जगह हैं जिनका इतिहास से काफी गहरा संबध है

प्रयागराज में संगम किनारे हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है

माना जाता है कि इस मंदिर की कहानी हनुमान जी के पुनर्जन्म से जुड़ी हुई है

पौराणिक कथाओं के अनुसार, लंका जीतने के बाद बजरंगबली पीड़ा के कारण मरणासन्न अवस्था में यहां पहुंच आए थे

तब सीता जी ने यहीं पर उन्हें अपना सिंदूर देकर नया जीवन दिया और उन्हें स्वस्थ और चिरंजीवी रहने का आशीर्वाद दिया

माता सीता ने यह भी कहा कि जो भी त्रिवेणी संगम में स्नान करेगा उसे उसका फल तभी मिलेगा जब वह बजरंगबली जी के दर्शन करेगा

हनुमान जी को “प्रयाग के कोतवाल” भी कहा जाता है

इतिहास की माने तो 1400 ईसवी में मुगल सम्राट औरंगजेब के शासन के दौरान इस प्रतिमा को हटाने के लिए 100 सैनिकों को लगाया गया था। लेकिन वे प्रतिमा को हिला भी नहीं सके

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Punjab Kesari इसकी पुष्टि नहीं करता है

रोटियां घंटों तक रहेंगी सॉफ्ट, अपनाएं ये Cooking Hacks

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।