Howrah ward delimitation bill : पश्चिम बंगाल विधानसभा ने बुधवार को हावड़ा वार्ड परिसीमन (डिलिमिटेशन) संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। सरकार के मंत्रियों का कहना है कि तेजी से बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए वार्डों की सीमाओं को फिर से तय करना बेहद जरूरी हो गया था, ताकि आम लोगों तक नागरिक सुविधाएं बेहतर और पारदर्शी तरीके से पहुंच सकें।
सदन में इस बिल के समर्थन में बोलते हुए नेताओं ने साफ किया कि विकास फंड का बंटवारा जनसंख्या के हिसाब से होना चाहिए न कि पुराने ढर्रे पर। इस दौरान पुराने बिल की कमियों को दूर कर लाए गए नए संशोधन विधेयक को हरी झंडी दी गई।
आबादी और फंड का असंतुलन दूर करने की कवायद
सदन की कार्यवाही के दौरान राज्य सरकार की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि जनता को बुनियादी सेवाएँ पहुंचाना सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा दी कि मौजूदा समय में कई वार्डों में आबादी का बड़ा अंतर है।
पॉल के मुताबिक, जिस वार्ड की आबादी 80 हजार है, उसे भी विकास के लिए उतना ही बजट मिलता है जितना 18 हजार की आबादी वाले वार्ड को दिया जा रहा है। इस असंतुलन को खत्म करने के लिए परिसीमन जरूरी था। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के एजेंडे में जनसुविधाएं कभी प्राथमिकता में नहीं रहीं, लेकिन मौजूदा सरकार इस व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटी है।
उत्तर बंगाल और सिलीगुड़ी में भी परिसीमन की मांग
विधेयक का समर्थन करते हुए मंत्री शंकर घोष ने कहा कि राज्य भर में बढ़ती आबादी के कारण सेवाओं के प्रभावी वितरण में दिक्कतें आ रही थीं। यह संशोधन बिल प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा।
वहीं मंत्री निसिथ प्रामाणिक ने कहा कि इस फैसले से कोलकाता और हावड़ा इलाकों के विकास को गति मिलेगी। प्रामाणिक ने इस मॉडल को राज्य के बाकी हिस्सों, खासतौर पर उत्तर बंगाल में लागू करने की जरूरत जताई। उन्होंने सुझाव दिया कि सिलीगुड़ी समेत उत्तर बंगाल के कई बड़े इलाकों में भी जल्द से जल्द वार्ड परिसीमन कराया जाना चाहिए।
पुरानी गलतियां सुधारकर नया विधेयक सर्वसम्मति से पास
मामले पर जानकारी देते हुए मंत्री उमेश राय ने बताया कि इससे पहले लाए गए एक विधेयक में कई तकनीकी त्रुटियां थीं। इस वजह से उस बिल को खारिज कर नए सिरे से ‘हावड़ा अमेंडमेंट सेकंड बिल’ सदन में पेश किया गया, जिसे सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया।
विधानसभा सत्र के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने असम में आई भीषण बाढ़ से हुई तबाही पर चिंता जताते हुए ‘चीफ मिनिस्टर रीलिफ फंड’ से असम सरकार को 10 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का ऐलान किया।
इसके साथ ही राज्य सरकार ने पूर्व विधायकों की आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने बुजुर्ग और ईमानदार पूर्व विधायकों की समस्याओं का जिक्र करते हुए उनका मेडिकल अलाउंस 6,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति माह करने की घोषणा की।
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