पुलिस कस्टडी में TMC कार्डर की मौत के बाद परिवार से मिलने पहुंची ममता बनर्जी की गाड़ी पर पथराव

Summary :

पश्चिम बंगाल के कांचरापाड़ा में टीएमसी कार्यकर्ता की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद भारी बवाल हो गया। पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचीं पूर्व सीएम ममता बनर्जी की गाड़ी पर पथराव, कीचड़ और जूते फेंके गए। ममता ने बीजेपी और पुलिस पर हमले का आरोप लगाया है।

Mamata Banerjee Bengal attack : पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को रविवार को कांचरापाड़ा दौरे के दौरान भारी विरोध का सामना करना पड़ा। वह पुलिस कस्टडी में जान गंवाने वाले टीएमसी कार्यकर्ता के परिजनों से मिलने पहुंची थीं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनकी कार को घेरकर ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए और गाड़ी पर कीचड़, जूते और ईंटें फेंकीं।

ममता बनर्जी ने इस हमले का आरोप बीजेपी और पुलिस पर लगाते हुए कहा कि राज्य में लॉ एंड ऑर्डर पूरी तरह खत्म हो चुका है और वह इस मामले पर कोर्ट जाएंगी। वहीं बीजेपी नेताओं ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि पार्टी ऐसे हिंसक व्यवहार का समर्थन नहीं करती और पुलिस इस पर उचित एक्शन लेगी।

पुलिस कस्टडी में हुई मौत के बाद बिगड़ा माहौल

विवाद की शुरुआत हालिशहर थाने की पुलिस द्वारा कांचरापाड़ा नगरपालिका की पूर्व टीएमसी पार्षद के पति बिरजू कीट को अरेस्ट करने से हुई। जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार बिरजू को कोर्ट ने 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा था, जहां शनिवार को उसकी मौत हो गई।

परिजनों का आरोप है कि पुलिस की बर्बर पिटाई से उसकी जान गई है। इसी घटना के बाद टीएमसी नेताओं में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। इससे पहले टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर भी डायमंड हार्बर में हमले की घटना सामने आई थी।

बीजेपी ने पल्ला झाड़ा

विरोध के दौरान ममता बनर्जी के साथ सांसद कल्याण बनर्जी और डोला सेन भी मौजूद थे। ममता ने कहा कि पुलिस गुंडों को संरक्षण दे रही है और अगर ईंट उनके सिर पर लगती तो उनकी जान भी जा सकती थी।

दूसरी तरफ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने साफ किया कि इस हमले में बीजेपी का कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्व महिला मुख्यमंत्री के साथ ऐसा बर्ताव हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है और सीएम शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पुलिस इस मामले में निष्पक्ष जांच करेगी।

यह भी पढ़ें – 1996 फरक्का जल संधि का रिन्यूअल: बिहार और बंगाल की चिंताओं के बीच संसद में उठी नए सिरे से समीक्षा की मांग

Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।