Albania Student Protest: आखिर क्यों अल्बानिया में प्रदर्शन कर रहे छात्र? PM के इस्तीफे की मांग तक पहुंचा आंदोलन

Summary :

Albania Student Protest: अल्बानिया की राजधानी तिराना में छात्रों का प्रदर्शन अब बड़े राजनीतिक संकट में बदल गया है। बेहतर शिक्षा, आर्थिक सहायता और रोजगार के अवसरों की मांग से शुरू हुआ आंदोलन अब प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे तक पहुंच गया है। लगातार विरोध-प्रदर्शनों ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

Albania Student Protest: अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। बेहतर शिक्षा और रोजगार की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्रों का प्रदर्शन अब प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग में बदल गया है। तीन दिनों से जारी विरोध-प्रदर्शन के दौरान राजधानी में तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों के साथ सरकारी इमारतों और दुकानों में तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई हैं। हालात ऐसे हो गए कि संसद का सत्र तक रद्द करना पड़ा।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,  अल्बानिया में छात्रों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं हैं। विश्वविद्यालयों की खराब हालत, पढ़ाई का महंगा खर्च, आर्थिक मदद  की कमी और डिग्री लेने के बाद नौकरी मिलने की शंका  ने युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया।

सरकारी इमारतों में आगजनी, पुलिस ने संभाला मोर्चा

13 अक्टूबर को शिक्षा मंत्रालय के बाहर शुरू हुआ यह प्रदर्शन जल्द ही राजधानी के दूसरे इलाकों में फैल गया। आंदोलन को उस समय और समर्थन मिला, जब आम नागरिक भी इसमें शामिल होने लगे। लोगों का आरोप है कि भ्रष्टाचार और सरकारी व्यवस्था की कमियों के कारण उनकी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। प्रदर्शनकारी एनिडा बिमी के मुताबिक, यह आंदोलन अब सिर्फ छात्रों की मांगों तक सीमित नहीं है। इसके जरिए लोग पूरी व्यवस्था के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। वहीं, आर्बर लेशी ने मौजूदा सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने पर पुलिस और भीड़ के बीच टकराव हुआ। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और गृह मंत्रालय के आसपास विरोध जताया। शिक्षा मंत्रालय परिसर के एक हिस्से में भी आगजनी की घटना हुई। इसके अलावा दो प्राइवेट  बैंकों और कई दुकानों की खिड़कियां तोड़े जाने की खबर है। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। इस दौरान 6 पुलिसकर्मी और एक महिला पत्रकार घायल हो गई । पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 39 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। इस बीच, स्थानीय मीडिया में पुलिसकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों को पीटने और घसीटने के वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। मानवाधिकार संगठन अल्बानियाई हेलसिंकी कमिटी ने पुलिस की कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

‘फ्लेमिंगो क्रांति’ के पीछे क्या है वजह?

अल्बानिया में सरकार के खिलाफ चल रहे विरोध को ‘फ्लेमिंगो क्रांति’ के नाम से भी जाना जा रहा है। इसके पीछे शिक्षा और रोजगार की समस्याओं के अलावा भ्रष्टाचार और एक विवादित पर्यटन परियोजना को लेकर नाराजगी भी बताई जा रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से जुड़ी एक लग्जरी रिसॉर्ट परियोजना विवादों में है। यह रिसॉर्ट अल्बानिया के दक्षिणी तट पर प्रस्तावित है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस परियोजना के लिए उनकी जमीन गलत तरीके से बेची गई। इस विवाद ने सरकार के प्रति लोगों के अविश्वास को और बढ़ाया है।

प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष

इस दौरान  प्रदर्शन को विपक्ष का भी समर्थन मिल रहा है। मुख्य विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता साली बेरिशा ने छात्रों की तारीफ करते हुए उनके आंदोलन का समर्थन किया है। दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री एडी रामा ने पद छोड़ने से इनकार कर दिया है। वह पिछले साल चौथी बार चुनाव जीतकर सत्ता में आए थे।

उप-प्रधानमंत्री अल्बाना कोसिउ, शिक्षा मंत्री मिरेला कुम्बरो और गृह मंत्री एरविन डेमो ने हिंसा की आलोचना की है। सरकार का कहना है कि शिक्षा के खर्च जैसे मुद्दों पर बातचीत हो सकती है, लेकिन सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

यह भी पढ़ें: मक्का की मस्जिद में अश्लील हरकत का मामला, सऊदी अरब में बांग्लादेशी कपल को मौत की सजा

Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।