सरकारी इमारतों में आगजनी, पुलिस ने संभाला मोर्चा
13 अक्टूबर को शिक्षा मंत्रालय के बाहर शुरू हुआ यह प्रदर्शन जल्द ही राजधानी के दूसरे इलाकों में फैल गया। आंदोलन को उस समय और समर्थन मिला, जब आम नागरिक भी इसमें शामिल होने लगे। लोगों का आरोप है कि भ्रष्टाचार और सरकारी व्यवस्था की कमियों के कारण उनकी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। प्रदर्शनकारी एनिडा बिमी के मुताबिक, यह आंदोलन अब सिर्फ छात्रों की मांगों तक सीमित नहीं है। इसके जरिए लोग पूरी व्यवस्था के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। वहीं, आर्बर लेशी ने मौजूदा सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने पर पुलिस और भीड़ के बीच टकराव हुआ। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और गृह मंत्रालय के आसपास विरोध जताया। शिक्षा मंत्रालय परिसर के एक हिस्से में भी आगजनी की घटना हुई। इसके अलावा दो प्राइवेट बैंकों और कई दुकानों की खिड़कियां तोड़े जाने की खबर है। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। इस दौरान 6 पुलिसकर्मी और एक महिला पत्रकार घायल हो गई । पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 39 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। इस बीच, स्थानीय मीडिया में पुलिसकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों को पीटने और घसीटने के वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। मानवाधिकार संगठन अल्बानियाई हेलसिंकी कमिटी ने पुलिस की कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
‘फ्लेमिंगो क्रांति’ के पीछे क्या है वजह?
अल्बानिया में सरकार के खिलाफ चल रहे विरोध को ‘फ्लेमिंगो क्रांति’ के नाम से भी जाना जा रहा है। इसके पीछे शिक्षा और रोजगार की समस्याओं के अलावा भ्रष्टाचार और एक विवादित पर्यटन परियोजना को लेकर नाराजगी भी बताई जा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से जुड़ी एक लग्जरी रिसॉर्ट परियोजना विवादों में है। यह रिसॉर्ट अल्बानिया के दक्षिणी तट पर प्रस्तावित है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस परियोजना के लिए उनकी जमीन गलत तरीके से बेची गई। इस विवाद ने सरकार के प्रति लोगों के अविश्वास को और बढ़ाया है।
प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष
इस दौरान प्रदर्शन को विपक्ष का भी समर्थन मिल रहा है। मुख्य विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता साली बेरिशा ने छात्रों की तारीफ करते हुए उनके आंदोलन का समर्थन किया है। दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री एडी रामा ने पद छोड़ने से इनकार कर दिया है। वह पिछले साल चौथी बार चुनाव जीतकर सत्ता में आए थे।
उप-प्रधानमंत्री अल्बाना कोसिउ, शिक्षा मंत्री मिरेला कुम्बरो और गृह मंत्री एरविन डेमो ने हिंसा की आलोचना की है। सरकार का कहना है कि शिक्षा के खर्च जैसे मुद्दों पर बातचीत हो सकती है, लेकिन सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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