पाकिस्तान: ‘औरत मार्च कराची’ को लेकर बवाल के बाद एनओसी, ‘पहनावे से लेकर नारों’ तक पर लगाई पाबंदी

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कराची, 9 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान की औरत मार्च पिछले कुछ दिनों से काफी सुर्खियों में रही। पुलिस-प्रशासन के बेजा पावर का इस्तेमाल इन पर किया गया और सरकार की खूब फजीहत भी हुई। ना-नुकुर के बाद रविवार को मार्च निकालने की इजाजत दे दी गई, लेकिन इसके साथ ही बहुत सारी पाबंदियां भी लगाई गई हैं। पहनावे से लेकर भाषण के शब्दों पर ध्यान देने की नसीहत है। प्रमुख अंग्रेजी दैनिक डॉन के अनुसार, सिंध सरकार ने रविवार को सी व्यू पर आयोजित होने वाली औरत मार्च कराची सभा के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी कर दिया है, लेकिन इसके…

कराची, 9 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान की औरत मार्च पिछले कुछ दिनों से काफी सुर्खियों में रही। पुलिस-प्रशासन के बेजा पावर का इस्तेमाल इन पर किया गया और सरकार की खूब फजीहत भी हुई। ना-नुकुर के बाद रविवार को मार्च निकालने की इजाजत दे दी गई, लेकिन इसके साथ ही बहुत सारी पाबंदियां भी लगाई गई हैं। पहनावे से लेकर भाषण के शब्दों पर ध्यान देने की नसीहत है।

प्रमुख अंग्रेजी दैनिक डॉन के अनुसार, सिंध सरकार ने रविवार को सी व्यू पर आयोजित होने वाली औरत मार्च कराची सभा के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी कर दिया है, लेकिन इसके साथ 28 शर्तें भी लगाई गई हैं। इनमें लगाए जाने वाले नारों की सामग्री पर प्रतिबंध भी शामिल है। यह जानकारी शनिवार को सामने आई।

यह मार्च मदर्स डे (10 मई 2026) के अवसर पर सी व्यू में आयोजित की जानी है। मदर्स डे हर वर्ष मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है।

पिछले रविवार को कराची में औरत मार्च के आयोजकों ने कहा था कि उन्होंने आसिफा भुट्टो जरदारी को एक पत्र भेजा है, क्योंकि संबंधित कार्यालयों को एनओसी के लिए दिए गए उनके अनुरोध पर “कोई जवाब” नहीं मिला था। बुधवार को औरत मार्च द्वारा आयोजित की जाने वाली एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कई आयोजकों की हिरासत के कारण बाधित हुई थी।

इसके बाद दक्षिण कराची के डिप्टी कमिश्नर जावेद नबी खुसो ने 8 मई की तारीख वाला एनओसी जारी किया, जिसमें रविवार को दोपहर 3:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक “मदर्स डे के उपलक्ष्य में औरत मार्च” आयोजित करने की अनुमति दी गई।

एनओसी में 4 मई को दक्षिण के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) की ओर से खोसो को भेजे गए ‘नो ऑब्जेक्शन’ पत्र का हवाला दिया गया, जो औरत मार्च द्वारा आसीफा भुट्टो जरदारी को पत्र भेजने के एक दिन बाद जारी किया गया था।

इसमें कहा गया, “कोई भी सांप्रदायिक या आपत्तिजनक गतिविधि/भाषण की अनुमति नहीं होगी, जो विभिन्न समूहों के बीच नफरत पैदा करे या लोगों की भावनाओं को भड़काए अथवा आहत करे।”

जिला प्रशासन ने औरत मार्च कराची के वक्ताओं को “पाकिस्तान की विचारधारा” या राज्य की नीतियों के खिलाफ कोई भाषण देने से रोक दिया। साथ ही वक्ताओं को सशस्त्र बलों के खिलाफ बोलने या “समुदायों के बीच नफरत और उग्रवाद फैलाने” से भी प्रतिबंधित किया गया।

एनओसी में, “बीवाईसी (बलूच यकजेहती कमेटी), जेक्यूएसएम (जेय सिंध कौमी महाज) जैसे किसी भी बैन संगठन/रोक लगाए गए संगठन को हिस्सा लेने, समर्थन करने या प्रतिनिधित्व करने की सख्त इजाजत नहीं होगी।”

जिला प्रशासन ने हिस्सा लेने वालों को यह भी आदेश दिया कि वे पहनावे का ख्याल रखेंगे, “गलत कपड़े न पहनें” या एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी का “प्रमोशन” न करें, जिसमें ट्रांसजेंडर लोग भी शामिल हैं।

औरत मार्च के आयोजकों को कानून-व्यवस्था से संबंधित मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन सुनिश्चित करने और पूरे कार्यक्रम के दौरान कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अलावा जिला प्रशासन से सहयोग करने के निर्देश दिए गए।

12वीं शर्त में कहा गया कि “आम जनता और यातायात में कोई बाधा या व्यवधान नहीं होना चाहिए, विशेष रूप से मुख्य सड़कों और मार्गों को हर प्रकार की रुकावट से मुक्त रखा जाए।” इसके अलावा, औरत मार्च लाउडस्पीकर अध्यादेश का सख्ती से पालन करे और प्रवेश तथा निकास बिंदुओं को केवल एक स्थान तक सीमित रखे।

इसके अलावा, आयोजकों को स्वयंसेवक प्रतिभागियों की शारीरिक तलाशी लेने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि वे वॉक-थ्रू गेट्स से होकर गुजरें। साथ ही, मेटल डिटेक्टर और विस्फोटक जांच उपकरणों का उपयोग भी किया जाए।

इसमें कई ऐसे नियम हैं जो मानवाधिकारों को खुली चुनौती देते हैं। इसमें लिखा है: “बम निरोधक दस्ता कार्यक्रम स्थल की तकनीकी जांच करेगा और फिर स्थल आयोजकों को सौंपेगा। इसके बाद आयोजक स्वयंसेवकों को मंच के पीछे, प्रवेश/निकास स्थलों और पार्किंग क्षेत्रों में तैनात करेंगे।”

इसमें यह भी कहा गया कि पार्किंग स्थल मुख्य कार्यक्रम स्थल से कम से कम 200 गज दूर बनाए जाएं और सुचारु पार्किंग व्यवस्था के लिए स्वयंसेवकों को तैनात किया जाए। पार्किंग में आने वाले सभी वाहनों की पूरी जांच और स्कैनिंग भी अनिवार्य होगी।

इसके अलावा, औरत मार्च कराची किसी भी दुर्घटना, कानून-व्यवस्था की स्थिति, मार्ग/स्थल विवाद या सुरक्षा संबंधी घटना के लिए “पूर्ण रूप से जिम्मेदार” होगी और उसे “अपने जोखिम और खर्च पर कानूनी परिणामों का सामना करना होगा।”

इसके अलावा आयोजकों से कहा गया कि वे कानून प्रवर्तन एजेंसियों और जिला प्रशासन के निर्देशों का “पूरी तरह और ईमानदारी से” पालन करें। प्रशासन आवश्यक होने पर कार्यक्रम का मार्ग या स्थल बदल सकता है या समय से पहले कार्यक्रम समाप्त करने का आदेश दे सकता है।

–आईएएनएस

केआर/

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