भद्रकाली का त्रिशूल, नंदी और षण्मुख कार्तिकेय की प्रतिमा लौटाएगा ऑस्ट्रेलिया

मेलबर्न, 9 जुलाई (आईएएनएस)। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों में नया अध्याय जोड़ते हुए ऑस्ट्रेलिया ने अपनी संस्थाओं में संरक्षित तमिलनाडु मूल की तीन महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहरों को स्वेच्छा से भारत लौटाने का फैसला किया है। यह घोषणा मेलबर्न में गुरुवार को आयोजित तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान हुई, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता हुई।

गवर्नमेंट हाउस पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक और पारंपरिक स्वागत किया गया। इसके बाद दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच एकांत वार्ता और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक हुई, जिसमें भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के छह वर्ष पूरे होने पर संतोष व्यक्त किया गया।

दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और ऐतिहासिक धरोहरों के सम्मान को द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए इस पहल का स्वागत किया। जिन धरोहरों को भारत लौटाया जाएगा, उनमें पवित्र नंदी की पाषाण प्रतिमा, भद्रकाली की आकृति वाला धातु का त्रिशूल और भगवान कार्तिकेय (षण्मुख) की छह मुखों वाली पत्थर प्रतिमा शामिल हैं। ये तीनों प्राचीन धरोहरें तमिलनाडु से संबंधित हैं और फिलहाल ऑस्ट्रेलिया की सांस्कृतिक संस्थाओं के संग्रह में सुरक्षित हैं। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन्हें भारत भेजा जाएगा।

भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने बयान जारी कर शिखर सम्मेलन के बाद हुई अहम घोषणाओं की जानकारी दी।

बैठक के दौरान व्यापार और निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, साइबर सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियां, अंतरिक्ष, असैन्य परमाणु ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे अनेक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) को जल्द अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई, जिससे व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है।

पीएम मोदी और अल्बनीज ने ऑस्ट्रेलिया-भारत सीईओ फोरम और इकोनॉमिक बिजनेस रोडमैप कार्यक्रम के सकारात्मक परिणामों का स्वागत किया साथ ही उद्योग जगत से नए निवेश अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग पर भी संतोष व्यक्त किया गया। भारत में ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों की बढ़ती मौजूदगी को नवाचार, अनुसंधान और भविष्य के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया।

बैठक में ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय की भी सराहना की गई। दोनों नेताओं ने कहा कि भारतीय प्रवासी दोनों देशों के बीच एक जीवंत सेतु का कार्य कर रहे हैं और सांस्कृतिक एवं सामाजिक संबंधों को लगातार मजबूत बना रहे हैं। सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी के फैसले को भी इसी विश्वास और आपसी सम्मान का प्रतीक बताया गया।

शिखर सम्मेलन के दौरान समुद्री सुरक्षा, असैन्य परमाणु ऊर्जा, कौशल विकास, उभरती प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा फिल्म निर्माण सहित कई क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा रक्षा एवं सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, शिक्षा, सांस्कृतिक संपदाओं की वापसी, सौर ऊर्जा और पारंपरिक ज्ञान जैसे क्षेत्रों में भी कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया गया।

वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया और स्वतंत्र, खुला तथा समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया सरकार और प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज द्वारा दिए गए गर्मजोशी भरे स्वागत और आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया।

–आईएएनएस

केआर/

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