आयकर विभाग में MTS की नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी, तीन गिरफ्तार

Delhi : आयकर विभाग में MTS की नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी, तीन गिरफ्तार

Delhi : सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने आयकर विभाग में मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) की सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। हौजकाजी थाना पुलिस ने इस गिरोह में शामिल रोहित चौहान उर्फ दीपक तिवारी (37), चिराग अग्रवाल उर्फ नवीन प्रकाश (41) और तरुण गोस्वामी उर्फ गिरिराज (37) को गिरफ्तार कर लिया है।

वहीं, आयकर विभाग के पूर्व एमटीएस कर्मचारी पवन दत्त शर्मा (38) को बाउंड डाउन किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। अब तक की जांच में सात पीड़ितों से करीब 10 से 12 लाख रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है, जबकि गिरोह के मुख्य सरगना समेत अन्य आरोपी अभी फरार हैं।

डीसीपी (सेंट्रल) रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि गत 18 मई को अजमेरी गेट निवासी एक युवक ने शिकायत दर्ज कराई थी कि नवीन प्रकाश, दीपक तिवारी और रोहित चौहान ने आयकर विभाग में एमटीएस की नौकरी दिलाने के नाम पर उससे 2.03 लाख रुपये ठग लिए। शिकायत के अनुसार, दिसंबर 2025 में आरोपी नवीन प्रकाश ने खुद को आयकर विभाग का कर्मचारी बताकर भरोसा जीता और बाद में पीड़ित की मुलाकात सह-आरोपी दीपक तिवारी से कराई।

2026 तक नियुक्ति का दिया जाता रहा झांसा

आरोपियों ने पहले 5 हजार रुपये नकद लिए, जबकि 1.98 लाख रुपये रोहित चौहान के बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए। भरोसा कायम रखने के लिए पीड़ित को आयकर विभाग का फर्जी वेरिफिकेशन फॉर्म भी दिया गया और मार्च 2026 तक नियुक्ति का झांसा दिया जाता रहा। बाद में सभी आरोपी फरार हो गए, जिसके बाद हौजकाजी थाने में एफआईआर दर्ज हुई।

जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल, बैंक खातों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर 3 जुलाई को रोहित चौहान को रोहिणी से गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर चिराग अग्रवाल और तरुण गोस्वामी को भी दबोच लिया गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह सोशल मीडिया पर आयकर विभाग में भर्ती के फर्जी विज्ञापन डालकर बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसाता था।

एक से दो लाख रुपये लेने के बाद पीड़ितों का सिविक सेंटर परिसर में फर्जी इंटरव्यू कराया जाता था और उनके शैक्षणिक दस्तावेज भी जमा कराए जाते थे। चिराग अग्रवाल और तरुण गोस्वामी पूर्व एमटीएस कर्मचारी होने के कारण आसानी से परिसर में प्रवेश कर लेते थे और पीड़ितों को अंदर ले जाकर पूरी प्रक्रिया का नाटक करते थे। मोटी रकम वसूलने के बाद आरोपी संपर्क तोड़ देते थे। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश के साथ मामले की विस्तृत जांच में जुटी है।

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