नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। ‘वीगन’ इन दिनों ट्रेंड में है। ऐसा ट्रेंड जिसमें डेयरी प्रोडक्ट्स की जगह प्लांट-बेस्ड उत्पादों को तरजीह दी जाती है। दुग्ध उत्पादों का विकल्प बादाम, सोया और ओट्स में तलाश लिया गया है। वीगन जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को इसकी प्रमुख वजह माना जाता है। हालांकि एक नए अध्ययन ने इस बदलाव को लेकर चिंता जताई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि डेयरी उत्पादों को पूरी तरह या आंशिक रूप से प्लांट-बेस्ड विकल्पों से बदलने पर शरीर में आयोडीन, कैल्शियम, विटामिन बी12 और राइबोफ्लेविन जैसे जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
यह अध्ययन ‘द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें ब्रिटेन के बाजार में उपलब्ध 289 प्लांट-बेस्ड उत्पादों का विश्लेषण किया गया। इनमें 146 प्लांट-बेस्ड दूध, 76 दही और 67 पनीर के विकल्प शामिल थे। शोधकर्ताओं ने इन उत्पादों में आयोडीन, कैल्शियम, विटामिन बी12 और विटामिन बी2 (राइबोफ्लेविन) की मात्रा का आकलन किया।
अध्ययन में पाया गया कि इन उत्पादों में पोषक तत्वों की मात्रा और उन्हें अतिरिक्त रूप से मिलाने की प्रक्रिया में काफी अंतर है। जांचे गए उत्पादों में केवल 12 प्रतिशत में आयोडीन, 61 प्रतिशत में कैल्शियम, 46 प्रतिशत में विटामिन बी12 और 19 प्रतिशत में राइबोफ्लेविन मिलाया गया था।
शोधकर्ताओं के अनुसार, डेयरी उत्पादों का एक हिस्सा भी प्लांट-बेस्ड विकल्पों से बदलने पर पोषक तत्वों का सेवन प्रभावित हो सकता है। अध्ययन के मुताबिक, डेयरी उत्पादों की खपत में 20 से 35 प्रतिशत तक की जगह प्लांट-बेस्ड विकल्प लेने पर 14 से 18 वर्ष की लड़कियों में आयोडीन की अपर्याप्त मात्रा का जोखिम 54 प्रतिशत से बढ़कर 65 प्रतिशत हो सकता है।
वहीं, 19 से 49 वर्ष की महिलाओं में यह आंकड़ा 32 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यदि डेयरी उत्पादों को पूरी तरह प्लांट-बेस्ड विकल्पों से बदल दिया जाए तो किशोरियों में आयोडीन की अपर्याप्त मात्रा का जोखिम 80 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
कैल्शियम को लेकर भी अध्ययन में चिंता जताई गई है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यदि सभी डेयरी उत्पादों की जगह प्लांट-बेस्ड विकल्प ले लें तो 14 से 18 वर्ष के लड़कों में कैल्शियम की अपर्याप्त मात्रा का जोखिम 30 प्रतिशत से बढ़कर 47 प्रतिशत और लड़कियों में 54 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत हो सकता है।
इसी तरह, विटामिन बी2 की अपर्याप्त मात्रा का जोखिम भी बढ़ सकता है। डेयरी उत्पादों को पूरी तरह बदलने की स्थिति में 19 से 49 वर्ष के पुरुषों में यह आंकड़ा 14 प्रतिशत से बढ़कर 26 प्रतिशत और महिलाओं में 29 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आयोडीन थायरॉयड ग्रंथि के सही कामकाज के साथ-साथ मस्तिष्क के विकास के लिए भी जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान इसकी पर्याप्त मात्रा विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है। कैल्शियम हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने के अलावा मांसपेशियों के संकुचन और दिल की धड़कन को नियंत्रित करने में मदद करता है। वहीं, विटामिन बी12 तंत्रिका तंत्र और रक्त कोशिकाओं के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। राइबोफ्लेविन त्वचा, आंखों और तंत्रिका तंत्र के स्वास्थ्य में भूमिका निभाता है।
अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खानपान को बढ़ावा देने के प्रयासों के साथ लोगों की पोषण संबंधी जरूरतों का भी ध्यान रखना जरूरी है। प्लांट-बेस्ड विकल्पों में आवश्यक विटामिन और खनिज तत्वों को उचित मात्रा में शामिल करना इसका एक महत्वपूर्ण तरीका हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने खाद्य उत्पादों में पोषक तत्वों को अनिवार्य रूप से मिलाने की नीति पर भी जोर दिया है। उनका मानना है कि केवल बाजार में प्लांट-बेस्ड विकल्पों की उपलब्धता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि ये उत्पाद पोषण के लिहाज से डेयरी उत्पादों के उपयुक्त विकल्प बन सकें।
–आईएएनएस
केआर/
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