जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों की प्रस्तावित वापसी पर ईयू ‘हैरान’

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नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। यूरोपीय संघ (ईयू) ने जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों की प्रस्तावित वापसी के समय पर आश्चर्य जताया है। यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष कायाह कल्लास ने कहा कि करीब 5,000 अमेरिकी सैनिकों की वापसी की घोषणा अप्रत्याशित थी। आर्मेनिया में आयोजित ‘यूरोपियन पोलिटिकल कम्युनिटी समिट’ में मीडिया से बातचीत के दौरान कल्लास ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यूरोप में तैनात अमेरिकी सैनिक न केवल यूरोप बल्कि अमेरिका के हितों की भी रक्षा करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में यूरोप को नाटो सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारियां और बढ़ानी होंगी। यह…

नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। यूरोपीय संघ (ईयू) ने जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों की प्रस्तावित वापसी के समय पर आश्चर्य जताया है। यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष कायाह कल्लास ने कहा कि करीब 5,000 अमेरिकी सैनिकों की वापसी की घोषणा अप्रत्याशित थी।

आर्मेनिया में आयोजित ‘यूरोपियन पोलिटिकल कम्युनिटी समिट’ में मीडिया से बातचीत के दौरान कल्लास ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यूरोप में तैनात अमेरिकी सैनिक न केवल यूरोप बल्कि अमेरिका के हितों की भी रक्षा करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में यूरोप को नाटो सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारियां और बढ़ानी होंगी।

यह प्रतिक्रिया उस समय आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी से सैनिकों को वापस बुलाने का ऐलान किया। यह फैसला जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के उस बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका को ईरान के साथ चल रहे युद्ध में “अपमानित” होना पड़ रहा है और वाशिंगटन के पास इस संघर्ष से बाहर निकलने की स्पष्ट रणनीति नहीं है।

मर्ज के बयान की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें इस विषय की समझ नहीं है और वे ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर गंभीर नहीं हैं।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा था कि अमेरिका जर्मनी में अपनी सैन्य मौजूदगी कम करने पर विचार कर रहा है और इस पर फैसला जल्द लिया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि स्पेन और इटली में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या भी घटाई जा सकती है।

इस बीच पेंटागन ने पुष्टि की कि 5 हजार सैनिकों की वापसी तय है। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में बातचीत के दौरान कहा, ‘हम जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की संख्या में बहुत ज्यादा कटौती करने जा रहे हैं, और यह नंबर 5 हजार से भी काफी ज्यादा होगा।’

इस कदम से ट्रांस-अटलांटिक संबंधों पर असर पड़ सकता है और यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। साथ ही, यह कदम नाटो के भीतर जिम्मेदारियों के बंटवारे और भविष्य की रणनीति पर भी सवाल खड़े करता है।

–आईएएनएस

केआर/

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