चीन की एआई ग्रोथ से डेटा सुरक्षा और आर्थिक प्रतिस्पर्धा पर चिंताएं बढ़ीं : रिपोर्ट

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नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। चीन के आर्टिफिशियल इटेलिजेंस (एआई) मॉडल तेजी से वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय हो रहे हैं, जिससे अमेरिकी नीति-निर्माताओं के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। ‘वॉर ऑन द रॉक्‍स’ के विश्लेषण के अनुसार, चीनी एआई सिस्टम, जो 2024 के अंत में वैश्विक वर्कलोड का केवल एक प्रतिशत थे, 2025 के अंत तक बढ़कर लगभग 30 प्रतिशत हो गए हैं। अलीबाबा जैसी कंपनियों की ओर से विकसित मॉडल, साथ ही डीपसीक, मूनशॉट एआई और म‍िनीमैक्‍स जैसे उभरते खिलाड़ी, अब अकादमिक शोध से लेकर एंटरप्राइज समाधानों तक विभिन्न क्षेत्रों…

नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। चीन के आर्टिफिशियल इटेलिजेंस (एआई) मॉडल तेजी से वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय हो रहे हैं, जिससे अमेरिकी नीति-निर्माताओं के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

‘वॉर ऑन द रॉक्‍स’ के विश्लेषण के अनुसार, चीनी एआई सिस्टम, जो 2024 के अंत में वैश्विक वर्कलोड का केवल एक प्रतिशत थे, 2025 के अंत तक बढ़कर लगभग 30 प्रतिशत हो गए हैं।

अलीबाबा जैसी कंपनियों की ओर से विकसित मॉडल, साथ ही डीपसीक, मूनशॉट एआई और म‍िनीमैक्‍स जैसे उभरते खिलाड़ी, अब अकादमिक शोध से लेकर एंटरप्राइज समाधानों तक विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग किए जा रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि ये मॉडल अक्सर ओपन-सोर्स और मुफ्त उपलब्ध होते हैं, लेकिन इन्हें चीन के कानूनी ढांचे के तहत विकसित किया जाता है, जहां कंपनियों को राष्ट्रीय खुफिया प्रयासों में सहयोग करना होता है। इससे यह चिंता बढ़ती है कि उपयोगकर्ताओं का डेटा सरकारी अधिकारियों तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट में शामिल विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि ऐसे मॉडलों का व्यापक उपयोग संवेदनशील जानकारी को जोखिम में डाल सकता है, क्योंकि यूजर्स तेजी से एआई सिस्टम पर अपने स्वामित्व वाले कोड, व्यापार रणनीतियों और गोपनीय संचार के लिए निर्भर हो रहे हैं।

विश्लेषण में अमेरिका के लिए चार प्रमुख चिंताओं की पहचान की गई है, एआई आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जोखिम, संभावित खुफिया संग्रह, दुर्भावनापूर्ण तत्वों की बढ़ी हुई क्षमताएं और दीर्घकालिक आर्थिक विस्थापन।

एक प्रमुख मुद्दा यह भी बताया गया कि एआई मॉडलों में छिपी कमजोरियों या ‘बैकडोर’ की जांच करना बेहद कठिन है। खासकर ओपन-सोर्स इकोसिस्टम में।

इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने पाया है कि कंप्रोमाइज्ड डेटा सेट्स में ऐसे दुर्भावनापूर्ण निर्देश शामिल हो सकते हैं, जिन्हें सामान्य जांच के दौरान पहचानना बहुत मुश्किल होता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जब एआई सिस्टम उपयोगकर्ताओं के इनपुट को चीन स्थित सर्वरों के माध्यम से प्रोसेस करते हैं, खासकर जब डेवलपर्स इन्हें एपीआई के जरिए जोड़ते हैं, तो डेटा के उजागर होने का खतरा बढ़ जाता है।

इसके अतिरिक्त, चीनी एआई मॉडलों में पश्चिम की तुलना में सुरक्षा उपाय अपेक्षाकृत कमजोर पाए गए, जिससे उनका दुरुपयोग आसान हो सकता है, जैसे हानिकारक कोड बनाना या साइबर हमलों में सहायता करना।

आर्थिक दृष्टि से कम लागत वाले चीनी मॉडलों की बढ़ती लोकप्रियता अमेरिकी कंपनियों के प्रभुत्व को चुनौती दे सकती है, विशेष रूप से उन बाजारों में जो कीमत के प्रति संवेदनशील हैं और विकासशील क्षेत्रों में, जहां ये तेजी से डिफॉल्ट विकल्प बनते जा रहे हैं।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय, नीति-निर्माताओं को पारदर्शिता, न्यूनतम सुरक्षा मानकों और आपूर्ति श्रृंखला की जवाबदेही पर ध्यान देना चाहिए, ताकि जोखिमों को कम किया जा सके और प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखी जा सके।

–आईएएनएस

एवाई/एबीएम

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