पाकिस्तान के बलूची और ब्राहुई रेडियो प्रोग्राम बंद, छात्र संगठन ने फैसले को चालाकी और दुर्भावनापूर्ण बताया

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क्वेटा, 14 मई (आईएएनएस)। एक बड़े छात्र संगठन ने ‘बलूचिस्तान डिजिटल पॉलिसी 2026’ के तहत पाकिस्तान के रेडियो ब्रॉडकास्ट से बलूची और ब्राहुई भाषा के प्रोग्राम हटाने की कड़ी निंदा की है। छात्र संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों के इस कदम को बहुत चालाकी और बदनीयत बताया है। बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (बीएसएसी) ने कहा कि यह फैसला, बलूची एकेडमी की सालाना फंडिंग में कटौती के साथ, बलूच समुदाय की भाषाओं को खत्म करने की कोशिश है। स्टूडेंट बॉडी के मुताबिक, बलूचिस्तान की दो मुख्य भाषाएं, बलूची और ब्राहुई, पहले से ही खत्म होने के खतरे का सामना कर रही हैं।…

क्वेटा, 14 मई (आईएएनएस)। एक बड़े छात्र संगठन ने ‘बलूचिस्तान डिजिटल पॉलिसी 2026’ के तहत पाकिस्तान के रेडियो ब्रॉडकास्ट से बलूची और ब्राहुई भाषा के प्रोग्राम हटाने की कड़ी निंदा की है। छात्र संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों के इस कदम को बहुत चालाकी और बदनीयत बताया है।

बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (बीएसएसी) ने कहा कि यह फैसला, बलूची एकेडमी की सालाना फंडिंग में कटौती के साथ, बलूच समुदाय की भाषाओं को खत्म करने की कोशिश है।

स्टूडेंट बॉडी के मुताबिक, बलूचिस्तान की दो मुख्य भाषाएं, बलूची और ब्राहुई, पहले से ही खत्म होने के खतरे का सामना कर रही हैं। आरोप है कि सरकार ने न तो उनके प्रमोशन और विकास के लिए सही इंतजाम किए और न ही उनके बचाव के लिए कोई प्रैक्टिकल कदम उठाए हैं।

बीएसएसी ने कहा, “दुनियाभर में, देश अपनी मातृभाषाओं में शिक्षा देते हैं और उनकी तरक्की के लिए साहित्य बनाते हैं ताकि मातृभाषाओं में ज्ञान का एक बड़ा भंडार मौजूद हो। फिर भी बलूचिस्तान में मातृभाषाओं का विकास करने के बजाय, सरकार उन्हें खत्म करने पर तुली हुई है। यह प्रक्रिया सीधे बलूच देश की पहचान से जुड़ी है। सरकार एक तरफ स्कूल के काम करने के तरीके और साक्षरता दर को बेहतर बनाने का दावा करती है। वहीं दूसरी तरफ, हम बलूची और ब्राहुई भाषाओं पर पाबंदियां और रुकावटें लगाते हुए देख रहे हैं।”

छात्र संगठन ने कहा कि बलूचिस्तान में लंबे समय से मातृभाषाओं पर बिना बताए बैन लगा हुआ है, जिससे ये भाषाएं खतरनाक रूप से खत्म होने के करीब पहुंच गई हैं। उन्होंने कहा कि इन भाषाओं को बचाने के बजाय, सरकार उन्हें पूरी तरह से खत्म करने की कोशिश कर रही है।

बीएसएसी ने दावा किया कि पिछले साल बलूचिस्तान यूनिवर्सिटी में बलूची, ब्राहुई और पश्तो भाषाओं के विभाग को खत्म करने की साजिश रची गई थी, जिसे प्रांत में पढ़ाई का सबसे पुराना और मुख्य सेंटर माना जाता है।

इसमें यह भी कहा गया कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने असेंबली में एक बिल पेश करके इस कदम का बचाव करने की कोशिश की, जिसमें स्टूडेंट एनरोलमेंट में कमी का हवाला दिया गया।

बीएसएसी ने कहा, “हमारा मानना ​​है कि यह भी एक सोची-समझी साजिश है, क्योंकि इन डिपार्टमेंट को जानबूझकर स्टूडेंट के एनरोलमेंट और पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाओं से वंचित रखा गया था। इतना ही नहीं, बल्कि हाल ही में सरकार ने कहा है कि बलूची एकेडमी के सालाना फंड में कटौती की जाएगी, जो पूरी तरह से मातृभाषा के बचाव और विकास के लिए काम करती है, यह मातृभाषाओं के खिलाफ सरासर जुल्म और अन्याय है। अब, ‘बलूचिस्तान डिजिटल पॉलिसी 2026’ के तहत रेडियो पाकिस्तान से ब्राहुई और बलूची भाषा के प्रोग्राम खत्म किए जा रहे हैं।”

छात्र संगठन ने कहा कि ऐसे कदम बलूच लोगों की पहचान पर हमला हैं, उनका कहना है कि भाषा और संस्कृति किसी देश की पहचान की नींव होते हैं और भाषा को खत्म करने से आखिर में लोगों का वजूद मिट जाता है।

उन्होंने कहा, “यह नीति बहुत चालाकी और गलत इरादे से लागू की जा रही है। हम न सिर्फ ऐसे फैसलों की कड़ी निंदा करते हैं, बल्कि इन कामों को भाषाओं का शोषण भी मानते हैं, जिससे हमें बहुत चिंता है। हम मांग करते हैं कि भाषाओं के खिलाफ गलत इरादे से लिए गए इन फैसलों की तुरंत समीक्षा की जाए और उन्हें वापस लिया जाए।”

–आईएएनएस

केके/पीएम

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