कांगो में इबोला का बढ़ता खतरा, 330 बच्चों की मौत: यूनिसेफ

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किंशासा, 6 अगस्त (आईएएनएस)। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में फैले इबोला प्रकोप ने 330 बच्चों की मौत हो गई। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव इतुरी प्रांत में जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने गुरुवार को यह जानकारी दी। यूनिसेफ के अनुसार, दो अगस्त तक डीआरसी में 17 वर्ष और उससे कम उम्र के बच्चों में इबोला के 743 पुष्ट मामले सामने आए थे, जिनमें 330 बच्चों की मौत हो चुकी है। स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने बताया कि कन्फर्म मामलों में से लगभग हर चौथा मामला बच्चों का है, लेकिन मौतों…

किंशासा, 6 अगस्त (आईएएनएस)। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में फैले इबोला प्रकोप ने 330 बच्चों की मौत हो गई। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव इतुरी प्रांत में जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

यूनिसेफ के अनुसार, दो अगस्त तक डीआरसी में 17 वर्ष और उससे कम उम्र के बच्चों में इबोला के 743 पुष्ट मामले सामने आए थे, जिनमें 330 बच्चों की मौत हो चुकी है।

स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने बताया कि कन्फर्म मामलों में से लगभग हर चौथा मामला बच्चों का है, लेकिन मौतों में उनकी हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई है। खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इस आयु वर्ग में मृत्यु दर वयस्कों की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।

यूनिसेफ के मुताबिक, इस प्रकोप की वजह से बच्चों के टीकाकरण, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं में भी भारी गिरावट आई है। संक्रमण के डर और स्वास्थ्य केंद्रों में आई बाधाओं के कारण कई परिवार इलाज के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं।

डीआरसी में यूनिसेफ के प्रतिनिधि जॉन एगबोर ने कहा, “इबोला का प्रकोप पूरे स्वास्थ्य तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। इसका असर मलेरिया, दस्त और अन्य इलाज योग्य बीमारियों के मामलों पर भी पड़ रहा है, जो बच्चों की मौत के सबसे बड़े कारणों में से हैं।”

अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा सहायता संगठन ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ ने बुधवार को चेतावनी दी कि पूर्वी डीआरसी की स्थिति ‘पहले से कहीं अधिक गंभीर’ हो गई है। संगठन ने कहा कि बीमारी बेहद तेज और अभूतपूर्व गति से फैल रही है और फिलहाल इसके धीमा पड़ने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।

मंगलवार तक, 15 मई को प्रकोप घोषित किए जाने के बाद से डीआरसी में इबोला के 3,973 पुष्ट मामले सामने आ चुके थे, जिनमें 1,801 लोगों की मौत हो चुकी है।

इसी बीच, स्वास्थ्य अधिकारियों ने बुधवार को किंशासा के बाहर एक यात्री नाव को रोक लिया है। यह कदम उस पूर्व यात्री की मौत के बाद उठाया गया, जिसमें इबोला संक्रमण होने का संदेह था।

यह नाव इबोला से प्रभावित त्शोपो प्रांत से आ रही थी और इसे मध्य किंशासा से लगभग 65 किलोमीटर दूर रोका गया। स्वास्थ्य मंत्री रोजर काम्बा ने बताया कि अलर्ट तब जारी किया गया जब मोंगाला प्रांत में नाव से उतरने वाले एक यात्री में बुखार और दस्त जैसे लक्षण दिखाई दिए और बाद में उसकी मौत हो गई।

काम्बा ने कहा, “हम एहतियात बरत रहे हैं। फिलहाल यह केवल एक संदिग्ध मामला है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।”

सरकारी प्रवक्ता पैट्रिक मुयाया ने बाद में बताया कि नाव के आसपास सुरक्षा और स्वास्थ्य निगरानी का घेरा बनाया गया है। साथ ही, एक मोबाइल प्रयोगशाला की मदद से सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की जांच की गई है।

–आईएएनएस

एवाई/

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