संयुक्त राष्ट्र, 8 अगस्त (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता कर्मियों ने कहा है कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) के पूर्वी प्रांत इतुरी में इबोला के प्रकोप का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को बताया कि इतुरी में इबोला का प्रकोप फैला हुआ है, जहां लगभग 10 लाख लोग विस्थापित हुए हैं और इनमें से लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे हैं।
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के अनुसार, कुल मौतों में बच्चों की हिस्सेदारी लगभग एक तिहाई है, जबकि कन्फर्म मामलों में उनकी संख्या लगभग एक चौथाई है।
इस प्रकोप से जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं में भी भारी रुकावट आ रही है। यूनिसेफ ने कहा कि इतुरी प्रांत के उन इलाकों में, जहां इबोला का सबसे ज्यादा असर है, हाल के महीनों में स्वास्थ्य सेवाओं के इस्तेमाल में 40 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है, क्योंकि संक्रमण के डर से लोग दूर रह रहे हैं।
शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष ने चेतावनी दी है कि इबोला के डर और स्वास्थ्य सेवाओं पर अत्यधिक दबाव के कारण कई गर्भवती महिलाएं इलाज नहीं ले पा रही हैं।
इतुरी में प्रकोप शुरू होने के बाद से प्रसव के दौरान होने वाली मौतों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। हर हफ्ते औसतन छह महिलाएं प्रसव से जुड़ी जटिलताओं के कारण जान गंवा रही हैं, जबकि गर्भावस्था के दौरान इबोला संक्रमण से लगभग हर मामले में भ्रूण की मौत हो जाती है।
ओसीएचए ने जोर देकर कहा कि समुदाय का भरोसा बहाल करना बहुत जरूरी है। यूनिसेफ और उसके सहयोगियों ने डीआरसी के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन और अफ्रीका सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के साथ मिलकर 13,000 कम्युनिटी वर्कर और अन्य लोगों को तैनात किया है। ये लोग इबोला से बचाव और शुरुआती पहचान के बारे में संदेश पहुंचाते हुए 24 लाख से ज्यादा लोगों तक पहुंचे हैं। उन्होंने गलत जानकारी का मुकाबला करने और लोगों को जल्द इलाज कराने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए 5 लाख से ज्यादा घरों का दौरा भी किया है।
पड़ोसी देश दक्षिण सूडान में, संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी इबोला के खिलाफ सरकार के नेतृत्व वाली तैयारी की कोशिशों में मदद करना जारी रखे हुए हैं। ओसीएचए ने कहा कि दक्षिण सूडान में अभी तक कोई मामला कन्फर्म नहीं हुआ है, लेकिन डीआरसी में प्रकोप और सीमाओं के आर-पार लोगों की आवाजाही के कारण खतरा बना हुआ है।
ओसीएचए ने बताया कि तैयारी की इन कोशिशों में मामलों की शुरुआती पहचान के लिए निगरानी, प्रवेश बिंदुओं पर स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण, चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराना और सामुदायिक जागरूकता अभियान शामिल हैं। इस महीने, हेल्थ पार्टनर ने साउथ सूडान में एंट्री पॉइंट्स पर 1,35,300 से ज्यादा यात्रियों की स्क्रीनिंग की। स्क्रीनिंग, ट्राइएज (मरीजों की प्राथमिकता तय करना), इन्फेक्शन से बचाव और कंट्रोल, रेफरल और सुरक्षित अंतिम संस्कार के लिए 300 से ज्यादा हेल्थ वर्कर और फ्रंट-लाइन कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी गई है। डीआरसी की सीमा के पास याम्बियो में 7 टन से ज्यादा इमरजेंसी सप्लाई भी पहले से ही जमा कर दी गई है।
हालांकि, असुरक्षा के कारण इस काम में रुकावटें आ रही हैं। जनवरी से जुलाई के बीच, पूरे साउथ सूडान में मानवीय कार्यों में रुकावट डालने या उन्हें खतरे में डालने वाली 451 घटनाएं सामने आईं। ओसीएचए के मुताबिक, पिछले साल जनवरी से येई-मोरोबो कॉरिडोर में मानवीय सहायता से जुड़े 32 कर्मचारियों के अपहरण की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो इबोला के सबसे ज्यादा जोखिम वाले इलाकों में काम करने की चुनौतियों को दिखाती हैं।
–आईएएनएस
पीआईएम/एएस
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