ब्रुसेल्स, 1 मई (आईएएनएस)। यूरोपीय संसद ने चीन के ‘एथनिक यूनिटी लॉ’ की कड़ी निंदा की है। उसने चेतावनी दी है कि यह कानून, जो एक जुलाई से लागू होने वाला है, तिब्बती लोगों की सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषाई पहचान को खत्म करने की एक व्यवस्थित कोशिश दिखाता है। इसमें राज्य की विचारधारा को थोपने और सभी सार्वजनिक जगहों पर स्थानीय भाषाओं की जगह मंडेरिन को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
इस कानून के खिलाफ यूरोपीय संसद में एक प्रस्ताव पास किया गया, जिसमें 439 सांसदों ने समर्थन में वोट दिया, 52 ने विरोध किया और 71 ने मतदान से दूरी बनाई।
यूरोपीय सांसदों ने कहा कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन पूरी तरह धार्मिक मामला है और इसे सिर्फ तिब्बती बौद्ध परंपराओं के अनुसार ही तय किया जाना चाहिए। इसमें किसी भी सरकार का दखल नहीं होना चाहिए।
सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (सीटीए) ने प्रस्ताव में कई बड़े राजनीतिक कैदियों को तुरंत और बिना शर्त रिहा करने की मांग की, जिनमें 11वें पंचेन लामा गेधुन चोएक्यी न्यिमा, चोत्रुल दोरजे रिनपोछे और पाल्डेन येशी शामिल हैं। इन सभी के बारे में लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी हुई है।
सीटीए ने कहा कि यूरोपीय संसद तिब्बती समुदायों को चीन के प्रभाव से बचाने के लिए कदम उठा रही है। सांसदों ने यह भी कहा कि चीन के इस कानून का असर सिर्फ चीन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दूसरे देशों में रह रहे तिब्बतियों को भी प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से यूरोपीय संघ के देशों से अपील की गई है कि वे चीन के साथ अपने प्रत्यर्पण (एक्स्ट्राडिशन) समझौतों को रोक दें, ताकि विदेशों में रह रहे तिब्बतियों पर दबाव और दमन रोका जा सके।
प्रस्ताव में कहा गया कि यूरोपीय संघ को मानवाधिकार उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ “ईयू ग्लोबल ह्यूमन राइट्स सैंक्शंस रेजीम” लागू करना चाहिए। बहस के दौरान, यूरोपीय आयोग की मानवतावादी सहायता और संकट प्रबंधन आयुक्त हादजा लाहबीब ने तिब्बत में मानवाधिकार स्थिति पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि धर्म और आस्था की स्वतंत्रता, संस्कृति और पहचान की सुरक्षा और धार्मिक समुदायों को अपने मामलों को खुद संभालने का अधिकार होना चाहिए। धार्मिक नेताओं के चयन में सरकार का दखल नहीं होना चाहिए और दलाई लामा जैसे मामलों में धार्मिक परंपराओं का सम्मान जरूरी है।
उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ लगातार 11वें पंचेन लामा के बारे में सही जानकारी और उनकी स्थिति व सेहत के बारे में जवाब मांगता रहेगा। इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए ब्रुसेल्स में दलाई लामा के कार्यालय (तिब्बत कार्यालय) की प्रतिनिधि रिगजिन जेनखांग ने यूरोपीय संसद का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ध्यान लगातार बना रहना बहुत जरूरी है, ताकि चीन को जवाबदेह ठहराया जा सके और तिब्बती संस्कृति व धार्मिक विरासत को बचाने के प्रयासों को समर्थन मिल सके।
–आईएएनएस
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