नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने गुरुवार को चेतावनी दी कि लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं के काम करने पर जारी पाबंदियों से देश को गंभीर नुकसान हो सकता है।
उन्होंने यूनिसेफ की एक हालिया रिपोर्ट का जिक्र किया। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर मौजूदा पाबंदियां जारी रहीं तो 2030 तक अफगानिस्तान में करीब 20,000 महिला शिक्षकों और 5,400 स्वास्थ्यकर्मियों की कमी हो सकती है। साथ ही, दो मिलियन (20 लाख) से ज्यादा लड़कियां प्राथमिक स्तर के बाद की पढ़ाई से वंचित रह सकती हैं।
करजई ने सोशल मीडिया पर कहा कि लड़कियों के लिए स्कूल और विश्वविद्यालय बंद रहने से देश की क्षमता कमजोर होगी और अफगानिस्तान बाहरी मदद पर ज्यादा निर्भर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि देश की समस्याओं का समाधान उसके अपने शिक्षित नागरिक ही कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा सभी के लिए जरूरी है और लड़कियों व लड़कों—दोनों को बराबर अवसर मिलने चाहिए। करजई ने मांग की कि लड़कियों के लिए स्कूल और उच्च शिक्षण संस्थान जल्द से जल्द खोले जाएं, ताकि देश अपने पैरों पर खड़ा हो सके।
रिपोर्ट ‘द कॉस्ट ऑफ इनएक्शन ऑ गर्ल्स एजुकेशन एंड विमेन लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन इन अफगानिस्तान’ (अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा और महिला श्रम शक्ति की भागीदारी में कमी की कीमत) में यह भी बताया गया है कि 2023 से 2025 के बीच सिविल सेवा में महिलाओं की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत से घटकर 17.7 प्रतिशत रह गई है।
कैथरिन रसेल ने कहा कि अगर लड़कियों को शिक्षा से दूर रखा गया तो भविष्य में शिक्षक, नर्स, डॉक्टर, दाई और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भारी कमी हो जाएगी, जिससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर गंभीर असर पड़ेगा।
उन्होंने अफगानिस्तान के मौजूदा शासकों से लड़कियों की माध्यमिक शिक्षा पर लगी पाबंदी हटाने की अपील की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी लड़कियों के शिक्षा के अधिकार के समर्थन में बने रहने का आग्रह किया।
–आईएएनएस
केआर/
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