महिला आरक्षण बिल पर श्रीलंकाई राजदूत ने कहा, ‘यह ज्यादा समावेशी शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम’

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नई दिल्ली, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत में श्रीलंका की हाई कमिश्नर महिषिनी कोलोन ने बुधवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के बारे में बात करते हुए कहा कि राजनीतिक संस्थाओं में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी को लेकर नीति बनाने में अलग-अलग नजरिए आ सकते हैं। आईएएनएस से ​​बात करते हुए महिषिनी कोलोन ने कहा, “राजनीतिक संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व मजबूत करना ज्यादा समावेशी शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संसद में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी को लेकर अलग-अलग नजरिए देखने को मिल सकते हैं और नीति बनाने में सकारात्मक योगदान मिल सकता है।” यह 16 अप्रैल से…

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत में श्रीलंका की हाई कमिश्नर महिषिनी कोलोन ने बुधवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के बारे में बात करते हुए कहा कि राजनीतिक संस्थाओं में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी को लेकर नीति बनाने में अलग-अलग नजरिए आ सकते हैं।

आईएएनएस से ​​बात करते हुए महिषिनी कोलोन ने कहा, “राजनीतिक संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व मजबूत करना ज्यादा समावेशी शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संसद में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी को लेकर अलग-अलग नजरिए देखने को मिल सकते हैं और नीति बनाने में सकारात्मक योगदान मिल सकता है।”

यह 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र से पहले हुआ है, जिसमें ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ में संशोधन और संसद में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को आसान बनाने के लिए प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर चर्चा होने की उम्मीद है।

इससे पहले मंगलवार को, केंद्र सरकार ने सांसदों के साथ संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026, या महिला रिजर्वेशन बिल में प्रस्तावित संशोधन का टेक्स्ट साझा किया, जिसका मकसद लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करना है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सदस्य भी शामिल हैं।

बिल में राज्यों के चुनाव क्षेत्रों से सीधे चुनाव से चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या पर 815 की लिमिट लगाने का प्रस्ताव है।

केंद्र शासित प्रदेश के लिए, बिल में कहा गया है, “केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए 35 से ज्यादा सदस्य नहीं होंगे, जिन्हें संसद कानून के तहत चुनेगी।”

अभी, राज्यों से 530 लोकसभा सदस्य और केंद्र शासित प्रदेश से 20 सदस्य हैं। हालांकि, एक डिलिमिटेशन कमीशन ने यह संख्या 543 तय की थी।

बिल में प्रस्तावित एक और अहम बदलाव आबादी की परिभाषा है, जिससे संसद को यह तय करने का अधिकार मिलता है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किस डेटा को आधार बनाया जाए।

संविधान के आर्टिकल 81 के अनुच्छेद (3) में बदलाव के लिए, बिल में प्रस्ताव है, “(3) इस आर्टिकल में, ‘आबादी’ का मतलब उस आबादी से है जो ऐसी जनगणना में पता चली है, जिसे संसद कानून के तहत तय कर सकती है, जिसके संबंधित आंकड़े प्रकाशित हो चुके हैं।”

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण जल्दी लागू करने और संसद के निचले सदन में सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए संविधान में बदलाव करने वाले बिल को मंजूरी दी थी।

इस बदलाव वाले बिल में आर्टिकल 82 में भी बदलाव का प्रस्ताव है, जिसमें “हर जनगणना पूरी होने पर, सीटों का बंटवारा” की जगह “सीटों का बंटवारा” शब्द रखा जाएगा।

इस बदलाव का मकसद कोटा को 2027 की जनगणना से अलग करके 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करना है, ताकि 2029 के आम चुनावों से पहले इसे लागू किया जा सके।

बता दें कि महिषिनी कोलोन ने 9 जून, 2025 को पद संभाला और 29 जुलाई, 2025 को अपने क्रेडेंशियल्स जमा किए। 1998 से एक करियर डिप्लोमैट, उन्होंने पहले भारत में डिप्टी हाई कमिश्नर (2011-14) के तौर पर काम किया और द्विपक्षीय संबंधों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान दिया। वह नई दिल्ली में हाई कमिश्नर के तौर पर काम करती हैं और साथ ही भूटान और अफगानिस्तान में भी उनकी नियुक्ति हुई है।

–आईएएनएस

केके/एबीएम

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