नई दिल्ली, 3 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट 2026 के दौरान डेनमार्क के व्यवसाय एवं प्रतिस्पर्धात्मकता मंत्री मार्टिन लिडेगार्ड के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने तथा स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े नए अवसरों पर चर्चा की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए जोशी ने बताया कि बैठक में ऑफशोर विंड एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण जैसे क्षेत्रों में भारत-डेनमार्क सहयोग को विस्तार देने पर विचार-विमर्श किया गया।
जोशी ने भारत के तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक निवेश अवसरों को रेखांकित करते हुए डेनमार्क की कंपनियों को तकनीकी साझेदारी, संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) और स्थानीय विनिर्माण के माध्यम से अधिक भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।
बैठक के दौरान दोनों देशों ने भारत-डेनमार्क ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने तथा स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
इससे पहले डेनमार्क के मंत्री मार्टिन लिडेगार्ड ने सोमवार को मुंबई का दौरा किया था, जहां उन्होंने समुद्री मामलों, हरित शिपिंग, प्रौद्योगिकी, व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि डेनमार्क और महाराष्ट्र लगभग समान आकार की अर्थव्यवस्थाएं हैं और दोनों के पास एक-दूसरे को देने के लिए काफी अवसर मौजूद हैं।
लिडेगार्ड ने बताया कि 60 से अधिक डेनिश कंपनियां पहले से महाराष्ट्र में काम कर रही हैं और प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के बाद व्यावसायिक अवसरों में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि डेनमार्क की प्रमुख शिपिंग कंपनी मर्स्क भारत के समुद्री क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही है। मुंबई में कंपनी के टर्मिनल का दौरा करने के बाद उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में महाराष्ट्र और डेनमार्क के बीच समुद्री सहयोग और निवेश संबंध और मजबूत होंगे।
यात्रा के दौरान लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के चेयरमैन एस.एन. सुब्रमण्यम को डेनमार्क का मानद वाणिज्य दूत नियुक्त किया गया। लिडेगार्ड ने महाराष्ट्र के राज्यपाल झिष्णु देव वर्मा से भी मुलाकात कर डेनिश निवेश, भारत-ईयू एफटीए और समुद्री क्षेत्र तथा बुनियादी ढांचे में उभरते आर्थिक अवसरों पर चर्चा की।
उन्होंने एपीएम टर्मिनल्स मुंबई का भी दौरा किया, जिसे मर्स्क ग्रुप संचालित करता है। यहां बंदरगाह संचालन, बुनियादी ढांचा विकास, हरित प्रौद्योगिकियों के उपयोग और भारत-डेनमार्क समुद्री सहयोग को बढ़ाने के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ।
हाल के महीनों में डेनमार्क की कंपनियों ने भारत में निवेश बढ़ाया है। सितंबर में नोवोनेसिस ने पातालगंगा संयंत्र के विस्तार के लिए 60 करोड़ डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। वहीं अक्टूबर 2026 में इम्पैक्ट फंड डेनमार्क ने भारत की प्रमुख इलेक्ट्रिक बस कंपनी ग्रीनसेल मोबिलिटी में 230 मिलियन डेनिश क्रोनर (डीकेके) के निवेश की घोषणा की थी।
–आईएएनएस
डीबीपी
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