नई दिल्ली, 5 सितंबर (आईएएनएस)। भारत और रूस ने न्यायिक क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी समन्वय बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। दोनों देशों ने पहले हुए समझौतों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी कदमों पर भी चर्चा की।
यह बातचीत भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और रूस के मुख्य न्यायाधीश इगोर क्रास्नोव के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स चीफ जस्टिस फोरम के इतर हुई।
भारत में रूसी दूतावास ने टेलीग्राम पर जारी बयान में कहा, “4 सितंबर को दोनों देशों के सर्वोच्च न्यायिक संस्थानों के प्रमुखों की बैठक हुई। इसमें अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रयासों के समन्वय और पहले किए गए समझौतों को मजबूत करने की दिशा में निरंतर काम जारी रखने पर सहमति बनी।”
क्रास्नोव ने कहा कि विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के सिद्धांतों पर आधारित भारत-रूस सहयोग को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच “गर्मजोशी भरे व्यक्तिगत और मैत्रीपूर्ण संबंधों” से भी मजबूती मिलती है।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच पहले हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) की सराहना की गई। रूसी पक्ष ने अगले दो वर्षों के लिए न्यायिक सहयोग के एक कार्यक्रम का मसौदा भी तैयार कर भारत को विचार के लिए सौंप दिया है। इसमें दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी कई पहलों को शामिल किया गया है।
क्रास्नोव शुक्रवार को ब्रिक्स मुख्य न्यायाधीश फोरम में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे। हवाई अड्डे पर भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव और अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
रूसी दूतावास के अनुसार, अपनी यात्रा के दौरान क्रास्नोव ब्रिक्स देशों के न्यायिक प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य कानूनी और न्यायिक सहयोग को मजबूत करना है। फोरम में न्याय व्यवस्था में एआई के इस्तेमाल पर भी विशेष चर्चा हो रही है।
भारत का सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली में ब्रिक्स मुख्य न्यायाधीश फोरम की मेजबानी कर रहा है। यह आयोजन 4 सितंबर से शुरू हुआ और 6 सितंबर तक चलेगा।
फोरम में ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष तथा वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान न्याय वितरण, अंतरराष्ट्रीय विवाद समाधान, तकनीक और सतत विकास से जुड़े समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
–आईएएनएस
केआर/
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