ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता से भारत की खाड़ी देशों से साझेदारी तेल व्यापार से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा तक पहुंची

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नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता ऐतिहासिक रूप से मजबूत तेल संबंधों को निवेश, टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता तक फैली व्यापक साझेदारी में बदल रही है। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में दी गई। गल्फ टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ऊर्जा संबंध अभी भी रिश्तों की नींव बने हुए हैं, लेकिन सहयोग नए रणनीतिक क्षेत्रों तक विस्तार कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया, “सौर उपकरण, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और कम-कार्बन टेक्नोलॉजी सहित क्षेत्रों में खाड़ी की पूंजी और नवीकरणीय ऊर्जा विशेषज्ञता…

नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता ऐतिहासिक रूप से मजबूत तेल संबंधों को निवेश, टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता तक फैली व्यापक साझेदारी में बदल रही है। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में दी गई।

गल्फ टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ऊर्जा संबंध अभी भी रिश्तों की नींव बने हुए हैं, लेकिन सहयोग नए रणनीतिक क्षेत्रों तक विस्तार कर रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया, “सौर उपकरण, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और कम-कार्बन टेक्नोलॉजी सहित क्षेत्रों में खाड़ी की पूंजी और नवीकरणीय ऊर्जा विशेषज्ञता को भारत की इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और बाजार के आकार के साथ जोड़ा जा सकता है।”

मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी पर सहयोग को गहरा किया और भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में यूएई की भागीदारी बढ़ाने पर सहमति जताई तथा रणनीतिक गैस भंडार की संभावनाओं पर चर्चा की।

सहयोग का एक अन्य क्षेत्र खाद्य सुरक्षा है, जो खाड़ी की मांग को भारत की कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षमताओं से जोड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि भंडारण, लॉजिस्टिक्स और भरोसेमंद सप्लाई चेन में निवेश की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं।

कार्यक्रम के समय को महत्वपूर्ण बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि क्षेत्रीय तनावों ने ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए सुरक्षित जहाजरानी पर फिर से ध्यान बढ़ाया है, जबकि खाड़ी देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं में विविधता ला रहे हैं, उन्नत टेक्नोलॉजी में निवेश कर रहे हैं और एशिया के साथ कारोबारी संबंध मजबूत कर रहे हैं।

विस्तारित ब्रिक्स में सऊदी अरब और यूएई के जरिए खाड़ी का प्रतिनिधित्व है, जिससे वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय परिदृश्य में समूह का महत्व बढ़ता है। भारत के सभी छह जीसीसी देशों के साथ गहरे संबंध हैं और इसलिए वह खाड़ी और व्यापक ब्रिक्स समुदाय के बीच एक स्वाभाविक पुल की भूमिका निभाता है।

खाड़ी देश भारत की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण कच्चा तेल, एलएनजी और पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराते हैं, जबकि भारत खाद्य पदार्थ, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल, मशीनरी और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराता है। लाखों भारतीय खाड़ी में रहकर आजीविका कमाते हैं या कारोबार चलाते हैं, जो रिश्तों को एक मजबूत मानवीय आधार प्रदान करते हैं।

भारत-खाड़ी संबंध फरवरी 2026 में और मजबूत हुए, जब भारत ने जीसीसी के साथ संदर्भ की शर्तों पर हस्ताक्षर किए और एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते के लिए औपचारिक बातचीत शुरू की, जिसमें बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई शामिल हैं।

— आईएएनएस

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IANS Agency

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