दोहा, 1 जुलाई (आईएएनएस)। कतर की राजधानी दोहा में बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में अप्रत्यक्ष बातचीत जारी रही।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि फिलहाल बातचीत अप्रत्यक्ष तरीके से हो रही है। दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने नहीं मिल रहे हैं। बैठकें बंद कमरे में हो रही हैं और मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ा रहे हैं।”
सूत्र के मुताबिक, बातचीत का मुख्य मुद्दा 17 जून को इस्लामाबाद में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लागू करना है। इसमें ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों और होर्मुज स्ट्रेट की समुद्री सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं।
मंगलवार को कतर ने पुष्टि की थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर दोहा पहुंच चुके हैं लेकिन वे ईरानी अधिकारियों से सीधे मुलाकात नहीं करेंगे।
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल सीधे ईरान से बात करने के बजाय मध्यस्थों से मुलाकात करेगा। इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए एमओयू को लागू करने की प्रगति पर चर्चा होगी।
अल-अंसारी ने बताया कि ईरान की करीब छह अरब अमेरिकी डॉलर की फ्रीज संपत्ति अभी तक तेहरान को नहीं सौंपी गई है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच दोहा में हो रही बातचीत को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि यह बातचीत एमओयू को लागू करने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जबकि ईरान ने साफ किया है कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत तय नहीं है।
बाद में ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने कहा कि जब तक हाल ही में हुए एमओयू की कुछ शुरुआती शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक ईरान अमेरिका के साथ किसी अंतिम समझौते पर बातचीत नहीं करेगा।
कालीबाफ, जो ईरान की बातचीत करने वाली टीम के प्रमुख भी हैं, ने सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी को दिए इंटरव्यू में शांति एमओयू और अमेरिका के साथ बातचीत से जुड़े ताजा घटनाक्रम पर जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि ईरान के हालिया स्विट्जरलैंड दौरे का मकसद एमओयू की उन शर्तों को लागू कराना था, जिनमें सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना, लेबनान में शांति बहाल करना, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना, ईरानी कच्चे तेल के निर्यात के लिए अमेरिकी छूट जारी करना और ईरान की फ्रीज हुई संपत्तियां वापस दिलाना शामिल है।
कालीबाफ ने कहा कि जब तक ये पांच शुरुआती शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक समझौते की बाकी शर्तों पर अमल शुरू नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि ईरान, अमेरिका और लेबनान ने मिलकर संयुक्त समिति बनाने पर सहमति जताई है। इस समिति का काम युद्धविराम लागू कराना, लेबनान में युद्ध पूरी तरह खत्म कराना और उसकी संप्रभुता की रक्षा करना होगा। उन्होंने कहा कि तीन पक्षों में से ईरान और अमेरिका अपने-अपने प्रतिनिधियों के नाम पहले ही तय कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि ईरान एक तरफ बातचीत का रास्ता अपनाता है, लेकिन जहां जरूरत पड़ती है, वहां वह ताकत से जवाब देने से भी पीछे नहीं हटता।
–आईएएनएस
एवाई/पीएम
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