वाशिंगटन, 15 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान एक बार फिर समझौते के लिए तैयार हुआ है। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधियों ने अमेरिका से संपर्क किया और संकेत दिया कि तेहरान एक समझौता करना चाहता है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में यह दावा किया। ट्रंप ने कहा, “व्हाइट हाउस में साक्षात्कार से कुछ समय पहले उनके प्रतिनिधियों ने ईरानी अधिकारियों से बातचीत की थी।”
यह पूछे जाने पर कि उन्होंने आखिरी बार किसी ईरानी अधिकारी से कब बात की थी, ट्रंप ने कहा, “मैंने नहीं, बल्कि मेरे प्रतिनिधियों ने बात की। वास्तव में करीब एक घंटे पहले ही बातचीत हुई है।”
यह पूछे जाने पर कि ईरान ने क्या संदेश दिया है, ट्रंप ने कहा, “वे समझौता करना चाहते हैं।”
इस दौरान, डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान पर बार-बार समझौते तोड़ने का आरोप लगाया। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें भरोसा नहीं है कि इस ताजा संपर्क से कोई बड़ी सफलता मिलेगी या नहीं।
इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा, “बेहतर होगा कि आप समझौता कर लें। आपके पास कुछ नहीं बचेगा, कोई नहीं बचेगा।”
ट्रंप ने आगे कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, हम नागरिक आबादी को लेकर बहुत सावधानी बरत रहे हैं, लेकिन मैंने कहा कि समझौता कर लो, वरना तुम्हारे पास कुछ भी नहीं बचेगा।'”
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें लगता है कि ईरान समझौता स्वीकार करेगा, ट्रंप ने जवाब दिया, “उन्हें करना चाहिए। मुझे नहीं पता कि वे करेंगे या नहीं।”
ट्रंप ने कहा कि तनाव बढ़ने से कुछ समय पहले दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था, लेकिन ईरान आखिरी समय में पीछे हट गया। उन्होंने कहा, “हमारे बीच समझौता हो गया था और फिर उन्होंने आखिरी समय में उसे तोड़ दिया।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अब उन्हें तुरंत बातचीत करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने कहा, “अब हम अभी बातचीत नहीं करना चाहते। जैसे-जैसे अमेरिकी सैन्य दबाव बढ़ रहा है, ईरान के पास बातचीत की मेज पर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरानी नेता समझौते तक पहुंचने को लेकर गंभीर हैं, तो उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि उनके पास कोई विकल्प नहीं है।” राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका का सबसे अहम मकसद है।
ट्रंप ने कहा कि तेहरान के साथ समझौता करने का एकमात्र असरदार तरीका सैन्य दबाव है। उन्होंने कहा, “इन लोगों के साथ बातचीत करने का एकमात्र तरीका सैन्य ताकत दिखाना है।”
–आईएएनएस
डीसीएच/
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