वाशिंगटन, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर अमेरिकी सांसदों ने चिंता जाहिर की है कि वर्तमान हालातों में कहीं अमेरिका का ध्यान चीन पर से न हट जाए। उनका कहना है कि सैन्य संसाधनों और तैनाती पर बढ़ते दबाव के कारण वाशिंगटन की रणनीतिक प्राथमिकताएं प्रभावित हो सकती हैं।
पेंटागन के बजट पर एक सुनवाई में सदस्यों ने मिडिल ईस्ट में कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स समेत अमेरिकी सेनाओं के जमावड़े की ओर इशारा किया। यह ऐसे समय में है, जब चीन अपनी मिलिट्री पहुंच बढ़ा रहा है।
समिति के अध्यक्ष माइक डी. रॉजर्स ने कहा कि अमेरिका आज अभूतपूर्व वैश्विक खतरे का सामना कर रहा है, जिसमें चीन प्रमुख भूमिका निभा रहा है। चीन की सेना अब पहले की तरह केवल रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अब प्रशांत महासागर के गहरे हिस्सों तक शक्ति प्रदर्शन करने में सक्षम हो गई है। इसके लिए वह जहाजों, मिसाइलों और अंतरिक्ष क्षमताओं में तेजी से निवेश कर रहा है।
कई सांसदों ने चेतावनी दी कि मौजूदा युद्ध के कारण अमेरिका की रणनीतिक स्थिति इंडो-पैसिफिक में कमजोर हो सकती है, जहां चीन को सबसे बड़ा दीर्घकालिक खतरा माना जाता है।
उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में सैन्य संसाधनों की तैनाती बढ़ने से एशिया में किसी भी स्थिति का तुरंत जवाब देने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन ने कहा कि ऐसे निर्णय रणनीतिक संतुलन का हिस्सा होते हैं। उन्होंने कहा कि हर स्थिति में कुछ न कुछ समझौता करना पड़ता है और सैन्य तैनाती सुरक्षा प्राथमिकताओं के आधार पर तय की जाती है।
केन ने कहा कि रिस्क और ऑप्शन को ध्यान में रखकर फैसले लिए जाते हैं, जिसका मकसद कई इलाकों में कमिटमेंट को संतुलित करना होता है।
आलोचकों ने कहा कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक जुड़े रहने से अमेरिका की काबिलियत पर दबाव पड़ सकता है और दुश्मनों को गलत संकेत जा सकता है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि हिंद-प्रशांत से ध्यान हटाने से चीन को अपना असर बढ़ाने के लिए और जगह मिल सकती है।
रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सरकार के तरीके का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना दुनिया भर के खतरों से निपटने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि यह रणनीति तुरंत आने वाली चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ सभी इलाकों में रोकथाम बनाए रखने के लिए बनाई गई है।
अमेरिका की डिफेंस प्लानिंग में चीन की मिलिट्री बढ़त एक मुख्य चिंता का विषय रही है, जिसमें कानून बनाने वाले उसकी शिप बनाने की क्षमता और बढ़ते रक्षा खर्च का हवाला देते हैं।
हिंद प्रशांत अमेरिका की रणनीति के लिए एक अहम क्षेत्र बना हुआ है, जिसमें वाशिंगटन क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ साझेदारी और सहयोग को मजबूत कर रहा है।
–आईएएनएस
केके/वीसी
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