कोलकाता, 5 अगस्त (आईएएनएस)। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग पर छठी जॉइंट वर्किंग ग्रुप की बैठक बुधवार को ताशकंद में आयोजित की गई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव दिनेश कुमार और उज्बेकिस्तान के रक्षा मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग केंद्रीय विभाग के प्रमुख लेफ्टिनेंट कर्नल सुखरोबजोन सोदिकजोनोविच सिरोजोव ने की।
रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में बताया बैठक में संयुक्त प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यास, क्षमता निर्माण, रक्षा शिक्षा और रक्षा उद्योगों की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। संयुक्त प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यासों में विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल शामिल किए जाएंगे।
इन अभ्यासों का मुख्य फोकस आतंकवाद-रोधी अभियानों और दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर रहेगा। ये अभ्यास भारत और उज्बेकिस्तान दोनों देशों में आयोजित किए जाएंगे, जिससे सैनिकों को एक-दूसरे के अनुभवों, रणनीतियों और सर्वोत्तम तरीकों से सीखने का अवसर मिलेगा।
क्षमता निर्माण के तहत चल रहे शैक्षणिक कार्यक्रमों और तकनीकी सहायता की समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें और बेहतर बनाया जाएगा। इसी पहल के तहत भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ताशकंद स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ मिलिट्री सिक्योरिटी एंड डिफेंस का भी दौरा किया।
भारत के रक्षा निर्यातक के रूप में लगातार मजबूत होने के साथ-साथ रक्षा निर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। नई दिल्ली रक्षा क्षेत्र में नए उद्योगों की स्थापना पर विशेष जोर दे रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए तकनीक के आदान-प्रदान और रक्षा उपकरणों के रखरखाव से जुड़े विषयों पर भी बातचीत हुई।
यह बैठक नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव के बीच हुई चर्चाओं के क्रम में आयोजित की गई। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सुरक्षा और महत्वपूर्ण संसाधनों से जुड़े सहयोग को और मजबूत करना है।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रक्षा क्षेत्र में लंबे समय से व्यापक सहयोग रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग जॉइंट वर्किंग ग्रुप के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता है, जिसकी स्थापना वर्ष 2019 में हुई थी।
भारत और उज्बेकिस्तान नियमित रूप से ‘डस्टलिक’ नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास में भी भाग लेते हैं। इसका सातवां संस्करण 12 से 25 अप्रैल 2026 के बीच उज्बेकिस्तान के नमनगन स्थित गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में आयोजित किया गया था।
इस अभ्यास में महार रेजिमेंट और भारतीय वायु सेना के जवानों ने हिस्सा लिया था। अभ्यास का उद्देश्य अर्ध-पहाड़ी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में संयुक्त अभियानों की क्षमता, सामरिक समन्वय और आपसी तालमेल को बेहतर बनाना था।
–आईएएनएस
एवाई/
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