वाशिंगटन, 8 मई (आईएएनएस)। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के साथ संवाद प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आग्रह किया है। व्हाइट हाउस में व्यापार, टैरिफ और वैश्विक संघर्षों पर हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद लूला ने ट्रंप को 2010 के उस परमाणु समझौते की प्रति सौंपी, जिसकी मध्यस्थता ब्राजील और तुर्की ने की थी।
वाशिंगटन स्थित ब्राजील दूतावास में गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए लूला ने कहा कि उन्होंने ट्रंप से साफ कहा कि “युद्ध से ज्यादा असरदार बातचीत होती है।” उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से दुनिया में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
लूला ने कहा, “मेरा मानना है कि युद्ध की तुलना में बातचीत कहीं अधिक बेहतर है। मुझे लगता है कि ईरान पर हमला करने से उतना नुकसान होगा जितना वह कल्पना भी नहीं कर सकते।” लूला ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ट्रंप को 2010 का वह समझौता सौंपा, जिस पर ब्राजील और तुर्की ने ईरान के साथ उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत की थी।
लूला ने कहा, “हम ईरान को यह मानने के लिए तैयार कर पाए थे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।” हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में पश्चिमी देशों ने इस समझौते को कमजोर कर दिया।
उन्होंने कहा, “बड़े अफसोस की बात है कि जब हमने उस समझौते को अंतिम रूप दिया, तो मुझे नहीं पता कि ओबामा और यूरोपीय संघ, और बाकी दुनिया ने ईरान पर दबाव बढ़ाने का फैसला क्यों किया। शायद इसलिए क्योंकि यह समझौता तथाकथित ‘तीसरी दुनिया’ के देशों ने कराया था।”
लूला ने बताया कि ट्रंप ने उनसे कहा कि वह इस दस्तावेज को पढ़ेंगे। उन्होंने कहा, “मैंने उन्हें दस्तावेज दिया तो उन्होंने कहा- ‘मैं इसे आज रात पढ़ूंगा।’”
ब्राजील के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार न होने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया 1945 जैसी नहीं रही और ब्राजील, भारत, जर्मनी, जापान तथा दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों को वैश्विक फैसलों में ज्यादा भूमिका मिलनी चाहिए।
व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान परंपरागत ओवल ऑफिस प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई। लूला ने कहा कि उन्होंने जानबूझकर बैठक से पहले मीडिया से बात नहीं की। उन्होंने कहा, “बैठक से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का कोई मतलब नहीं था, जब तक बातचीत ही न हो जाए।”
बाद में ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि बैठक “बहुत अच्छी” रही और दोनों देशों के बीच व्यापार और खासतौर पर टैरिफ पर चर्चा हुई।
लूला ने बताया कि दोनों देशों ने व्यापार विवाद सुलझाने के लिए 30 दिनों के भीतर संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि टैरिफ और ब्राजील के व्यापार से जुड़े अमेरिकी जांच विवादों का समाधान निकल सकता है। उन्होंने कहा, “मैं बहुत आशावादी हूं। हम चाहते हैं कि अमेरिका फिर से ब्राजील में निवेश करे।”
लूला ने यह भी कहा कि ब्राजील अपने महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र, खासकर रेयर अर्थ परियोजनाओं में अमेरिकी भागीदारी चाहता है। लेकिन उन्होंने साफ किया कि ब्राजील सिर्फ कच्चा माल बेचने वाला देश बनकर नहीं रहना चाहता। उन्होंने कहा, “हम केवल निर्यातक बनकर नहीं रहना चाहते।”
क्यूबा के मुद्दे पर लूला ने दावा किया कि ट्रंप ने कहा है कि उनका “क्यूबा पर हमला करने का कोई इरादा नहीं” है। लूला ने इसे “अच्छा संकेत” बताया। उन्होंने कहा, “क्यूबा बातचीत चाहता है और वह लंबे समय से लगे प्रतिबंध खत्म करने का समाधान चाहता है।”
यह बैठक ऐसे समय हुई जब अमेरिका और ब्राजील के रिश्तों में टैरिफ, तकनीकी नियमों और ईरान समेत कई वैश्विक मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है। ट्रंप प्रशासन ब्राजील के सामानों पर नए टैरिफ लगाने पर भी विचार कर रहा है।
वैचारिक मतभेद और पुराने तनावों के बावजूद दोनों नेताओं ने आपसी रिश्तों को स्थिर बनाने की इच्छा दिखाई। लूला ने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि हाल की मुलाकातों में दोनों नेताओं के बीच अच्छी समझ बनी है।
–आईएएनएस
एएस/
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