ईरान संघर्ष के बाद भारत की बड़ी राहत कार्रवाई, 2,361 नागरिक सुरक्षित लौटे

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नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया संघर्ष के शुरू होने के बाद से अब तक 2,361 लोगों को सुरक्षित वापस भारत लाया जा चुका है। इनमें भारतीय छात्र, मछुआरे और तीन विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। नई दिल्ली में हुई साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से हमने 2,361 भारतीय नागरिकों को ईरान से सुरक्षित भारत लाने में मदद की है। इनमें से 2,060 लोग आर्मेनिया के रास्ते और 301 लोग अजरबैजान के रास्ते आए। इन 2,361 लोगों…

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया संघर्ष के शुरू होने के बाद से अब तक 2,361 लोगों को सुरक्षित वापस भारत लाया जा चुका है। इनमें भारतीय छात्र, मछुआरे और तीन विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

नई दिल्ली में हुई साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से हमने 2,361 भारतीय नागरिकों को ईरान से सुरक्षित भारत लाने में मदद की है। इनमें से 2,060 लोग आर्मेनिया के रास्ते और 301 लोग अजरबैजान के रास्ते आए। इन 2,361 लोगों में 1,041 भारतीय छात्र भी शामिल हैं, साथ ही तीन छात्र विदेशी (बांग्लादेश, श्रीलंका और गुयाना से एक-एक) हैं।”

ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते का सीजफायर 8 अप्रैल से लागू हुआ था। 11 अप्रैल को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया था कि 312 भारतीय मछुआरों को भी ईरान से सुरक्षित भारत लाया गया और यह काम आर्मेनिया के रास्ते हुआ। उन्होंने इसके लिए आर्मेनिया सरकार का धन्यवाद भी किया।

जयशंकर ने सोशल मीड‍िया अकाउंट एक्‍स पर लिखा, “312 भारतीय मछुआरों को ईरान से आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित भारत लाया गया। इसके लिए आर्मेनिया सरकार और मेरे मित्र अराता मिर्ज़ोयान को धन्यवाद। आर्मेनिया ईरान में फंसे भारतीयों की निकासी में मदद कर रहा है।”

आठ अप्रैल को ईरान में भारतीय दूतावास ने वहां मौजूद भारतीयों को सलाह दी थी कि वे जल्द से जल्द देश छोड़ दें और इसके लिए दूतावास के साथ संपर्क में रहें और बताए गए रास्तों का ही इस्तेमाल करें। दूतावास ने यह भी चेतावनी दी थी कि बिना संपर्क और समन्वय के किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर जाने की कोशिश न करें। साथ ही, आपातकालीन संपर्क नंबर भी जारी किए गए थे।

इससे पहले 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर हमले किए थे, जिनमें ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और आम नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए, जो इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिका के हितों को निशाना बना रहे थे और उसने होर्मुज स्‍ट्रेट पर भी सख्ती बढ़ा दी थी।

–आईएएनएस

एवाई/वीसी

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