क्वेटा, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तानी ड्रोन हमले में बलूचिस्तान के एक युवक की मौत हो गई और कई महिलाएं घायल हो गईं। स्थानीय मीडिया ने गुरुवार को इसे रिपोर्ट किया। घटना मस्तंग जिले की बताई जा रही है।
रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए, ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ ने बताया कि पाकिस्तानी सेना ने मस्तंग के कुर्दगाप इलाके में एक घर पर ड्रोन हमला किया, जिससे अब्दुल समद नाम का शख्स गंभीर रूप से घायल हो गया। घर में मौजूद महिलाएं भी घायल हुईं।
अब्दुल की अस्पताल ले जाते वक्त मौत हो गई। हमले में घायल महिलाओं को स्थानीय अस्पताल में शुरुआती इलाज के बाद, बेहतर इलाज के लिए क्वेटा भेज दिया गया।
हाल के दिनों में, इस इलाके में बलूच सशस्त्र समूहों द्वारा किए गए हमलों में पाकिस्तानी सेना और स्पेशल सर्विस ग्रुप के कई जवान मारे गए थे, जिसके बाद सेना ने एक बड़े पैमाने पर ऑपरेशन शुरू किया, जो अभी भी जारी है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह पहली बार नहीं है जब बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के ड्रोन हमलों से आम नागरिक हताहत हुए हैं; ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती रही हैं।
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग सहित कई अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, और साथ ही बलूच राजनीतिक दलों ने इन हमलों में आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की। ये संगठन सरकार से बलूचिस्तान में ऐसी और घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करने की अपील करते रहे हैं।
पिछले हफ्ते ही बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की ओर से दागे गए मोर्टार में एक बलूच परिवार के तीन सदस्य मारे गए थे, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था।
बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ ने बताया कि यह दुखद घटना 31 मार्च की शाम को अवारान जिले के बुंगुल बाजार इलाके में हुई थी।
संगठन ने बताया कि कथित तौर पर बलूच सशस्त्र समूहों द्वारा पास के एक सैन्य शिविर पर हमला किए जाने के बाद, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने आम आबादी वाले इलाकों के करीब मोर्टार दागे और कई भारी हथियारों का इस्तेमाल किया।
इस गोलाबारी के दौरान, एक मोर्टार बुंगुल बाजार स्थित रिहायशी इलाके में गिरा, जिससे एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई।
60 वर्षीय मोहम्मद उमर, 57 वर्षीय फैजा, और पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली उनकी बेटी महजैब बलूच इसमें मारे गए।
इस घटना की निंदा करते हुए, ‘बलूच वॉयस फॉर जस्टिस’ (बीवीजे) ने कहा, “यह घटना अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के संभावित उल्लंघन को उजागर करती है, विशेष रूप से ‘भेदभाव’ और ‘अनुपात’ के सिद्धांतों का उल्लंघन; ये सिद्धांत सभी पक्षों को आम नागरिकों और नागरिक संपत्तियों की रक्षा करने के लिए बाध्य करते हैं।”
–आईएएनएस
केआर/
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