क्वेटा, 13 जून (आईएएनएस)। बलूचिस्तान में आम नागरिकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बीच प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के हाथों एक नागरिक की न्यायेतर हत्या (एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग) की गई है, जबकि दो अन्य लोगों को जबरन लापता कर दिया गया है।
मानवाधिकार संगठन बलूच यकेती कमिटी (बीवाईसी) के अनुसार, 28 वर्षीय सद्दाम का शव शुक्रवार को केच जिले के तुर्बत क्षेत्र के डी-बलोच इलाके में बरामद हुआ। संगठन का कहना है कि उनकी मौत की परिस्थितियों ने स्थानीय लोगों और मानवाधिकार पर्यवेक्षकों के बीच गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
बीवाईसी ने अपने बयान में कहा कि इस तरह की घटनाएं प्रभावित परिवारों और पूरे समाज को गहरे दुख, भय और असुरक्षा में धकेल रही हैं। संगठन के मुताबिक, “सद्दाम की हत्या बलूचिस्तान में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की एक और दुखद कड़ी है। क्षेत्र के अनेक परिवार अपने प्रियजनों को खोने का दर्द झेल रहे हैं, जबकि उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।”
संगठन ने इस कथित न्यायेतर हत्या की निंदा करते हुए कहा कि बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि आम नागरिक लगातार असुरक्षित हैं और प्रभावित परिवारों को अनिश्चितता तथा शोक का बोझ उठाना पड़ रहा है। बीवाईसी ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, पत्रकारों और वैश्विक संस्थाओं से मामले का संज्ञान लेने की अपील की है।
इसी बीच, मानवाधिकार संगठन बलूच वॉयस ऑफ जस्टिस (बीवीजे) ने आरोप लगाया कि 19 वर्षीय शुक्रुल्लाह और 20 वर्षीय जुबैर बलूच नामक दो छात्रों को 4 जून को बलूचिस्तान के दलबंदिन क्षेत्र से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा जबरन गायब कर दिया गया।
बीवीजे के अनुसार, दोनों छात्रों के परिवार अब भी उनकी स्थिति और ठिकाने के बारे में किसी आधिकारिक जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। संगठन ने कहा कि जबरन गुमशुदगी मानवाधिकारों और कानून के शासन का गंभीर उल्लंघन है।
संगठन ने प्रभावित परिवारों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि “नागरिकों का लगातार लापता होना बलूचिस्तान में भय और असुरक्षा को और बढ़ा रहा है। प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्रता, कानूनी प्रक्रिया और मनमानी हिरासत से सुरक्षा का अधिकार है। सच और न्याय की मांग कर रहे परिवारों की आवाज सुनी जानी चाहिए।”
यह आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति और मानवाधिकारों को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अतीत में ऐसे कई आरोपों से इनकार करती रही हैं, जबकि मानवाधिकार समूह स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
–आईएएनएस
केआर/
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