सोल, 10 जून (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम को छोड़ने की संभावना को और कमजोर कर दिया है। उनके अनुसार, मौजूदा वैश्विक सुरक्षा हालात उत्तर कोरिया को अपने परमाणु शस्त्रों को बनाए रखने के लिए और अधिक प्रेरित कर रहे हैं।
ब्रिटिश पत्रिका ‘द इकोनॉमिस्ट’ को दिए एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति ली ने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ‘विशिष्ट व्यक्तित्व’ उत्तर कोरिया को दोबारा वार्ता की मेज पर लाने में सहायक साबित हो सकता है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि संवाद के माध्यम से कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव कम करने के प्रयास आगे बढ़ सकते हैं।
हालांकि, ली ने यह भी स्पष्ट किया कि दक्षिण कोरिया स्वयं परमाणु हथियार हासिल करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया के लिए परमाणु हथियार विकसित करना न तो वांछनीय है और न ही व्यावहारिक। उन्होंने परमाणु अप्रसार को लेकर अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
रक्षा नीति पर राष्ट्रपति ली ने कहा, “देश की सुरक्षा के मामले में दक्षिण कोरिया को अपनी जिम्मेदारियां स्वयं उठानी होंगी और अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत करना होगा।”
देश की आंतरिक राजनीति पर भी बात की। ली ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल के 2024 में लगाए गए मार्शल लॉ से उत्पन्न राजनीतिक उथल-पुथल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “दक्षिण कोरिया अब असामान्य परिस्थितियों को सामान्य मानने की प्रवृत्ति से आगे बढ़ सकता है और भविष्य में दुनिया का नेतृत्व करने वाले देशों में शामिल हो सकता है।”
आर्थिक मुद्दों पर राष्ट्रपति ली ने यूनिवर्सल बेसिक इनकम जैसी योजनाओं का समर्थन किया। उनका कहना था कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीकी उछाल के कारण सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स जैसी चिप कंपनियों को हुए अतिरिक्त लाभ का कुछ हिस्सा आम जनता तक भी पहुंचना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों के आधार पर उनके महाभियोग या जेल जाने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। हालांकि, वर्तमान में राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उनके खिलाफ सभी मुकदमों की सुनवाई स्थगित है।
पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के निकट एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की जिसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों में मौजूद करीब 22 अमेरिकी बेस पर हमला किया। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की आशंकाओं को बढ़ा दिया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध समाप्त करने के लिए किसी समझौते की संभावनाओं पर काम करने की बात करते रहे हैं।
–आईएएनएस
केआर/
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