सोल, 11 सितंबर (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शुक्रवार को फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। यह जानकारी दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने दी।
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब दक्षिण कोरिया इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए सैन्य संसाधन भेजे जाएं। अमेरिका सोल पर इस दिशा में योगदान देने के लिए दबाव बना रहा है, जबकि ईरान किसी भी विदेशी सैन्य हस्तक्षेप का कड़ा विरोध करता रहा है।
योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत के दौरान चो ह्यून ने मध्य पूर्व की हालिया स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्र में जल्द ही स्थायी शांति और स्थिरता बहाल होगी।
होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर चो ने कहा कि दक्षिण कोरिया इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में अपनी भागीदारी जारी रखेगा।
उन्होंने दोहराया कि दक्षिण कोरिया हमेशा इस बात का समर्थन करता है कि सभी जहाजों को सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के गुजरने का अधिकार मिलना चाहिए।
मंत्रालय के अनुसार, चो ने ईरान से आग्रह किया कि वह क्षेत्र में मौजूद दक्षिण कोरियाई नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे।
दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अराघची ने मध्य पूर्व के मौजूदा हालात पर ईरान का पक्ष रखा। दोनों विदेश मंत्रियों ने सहमति जताई कि वे क्षेत्रीय घटनाक्रम और द्विपक्षीय मुद्दों पर आपसी संपर्क बनाए रखेंगे। इसके लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों माध्यमों का उपयोग किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि फरवरी के आखिर में शुरू हुए अमेरिका-ईरान तनाव के बाद से दोनों विदेश मंत्रियों के बीच यह छठी ज्ञात फोन बातचीत थी। ताजा बातचीत अराघची के अनुरोध पर हुई।
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है। इसकी वजह अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियां हैं। इसके साथ ही होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर में समुद्री टकराव भी तेज हुए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र के बड़े तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) उत्पादकों का निर्यात इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है।
–आईएएनएस
एवाई/पीएम
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