वॉशिंगटन, 23 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी सांसदों के एक द्विदलीय समूह ने ट्रंप प्रशासन से अंतरराष्ट्रीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए मौजूदा वीजा ढांचे को बनाए रखने का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि प्रस्तावित प्रतिबंध अमेरिका की तकनीकी बढ़त, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और अनुसंधान नेतृत्व को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी मार्कवेन मुलिन और ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट के डायरेक्टर रस वॉट को भेजे गए एक पत्र में, कांग्रेस के चार सदस्यों ने एफ-1 और जे-1 वीजा धारकों के लिए मौजूदा “ड्यूरेशन और स्टेटस” (स्थिति की अवधि) सिस्टम को एक तय चार साल की एडमिशन अवधि से बदलने के खिलाफ चेतावनी दी।
इस पत्र पर प्रतिनिधियों सैम लिकार्डो, जे ओबरनोल्टे, मारिया सालाजार और राजा कृष्णमूर्ति ने हस्ताक्षर किए थे। सांसदों ने कहा कि मौजूदा सिस्टम ‘संयुक्त राज्य अमेरिका में लंबी अवधि की पढ़ाई, रिसर्च और वर्कफोर्स डेवलपमेंट’ के लिए लचीलापन देता है, खासकर विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित के प्रोग्राम में, जहां डॉक्टरेट की पढ़ाई अक्सर छह साल से ज्यादा चलती है।
सांसदों ने लिखा, “अंतर्राष्ट्रीय छात्र एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, मेडिकल रिसर्च और दूसरी उभरती टेक्नोलॉजी में अमेरिका की प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। अगर हम उन्हें निकाल देते हैं, तो वे अपने देश लौटकर विदेशी कंपनियों, जैसे चीन की कंपनियों को हमारे खिलाफ मुकाबला करने में मदद करेंगे।”
अपने तीन पेज के पत्र में कांग्रेस सदस्यों ने तर्क दिया कि चार साल की सीमा कई छात्रों को बार-बार वीजा एक्सटेंशन लेने के लिए मजबूर करेगी, जिससे ‘अनावश्यक प्रशासनिक बोझ, प्रोसेसिंग में देरी और शैक्षणिक निरंतरता में रुकावटें’ आएंगी।
उन्होंने सर्वे के डेटा का भी हवाला दिया, जिससे पता चलता है कि लगभग आधे अंतर्राष्ट्रीय ग्रेजुएट छात्र और पोस्टडॉक्टोरल रिसर्चर संयुक्त राज्य अमेरिका में पढ़ाई करना नहीं चुनते, अगर ऐसी कोई तय एडमिशन अवधि होती।
पत्र में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में विदेशी छात्रों के आर्थिक योगदान पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय छात्र हर साल स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में लगभग 43 बिलियन डॉलर का योगदान देते हैं और 355,000 से ज्यादा अमेरिकी नौकरियों में मदद करते हैं।
सदस्यों ने लिखा, “अमेरिकी व्यवसायों, सामानों और नौकरियों के अवसर बनाने के लिए ऐसे अंतर्राष्ट्रीय विद्वानों, छात्रों और नागरिकों की एक टीम की जरूरत होती है, जो अमेरिका की आर्थिक और तकनीकी ताकत की रक्षा करने और उसे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हों।”
सांसदों ने चेतावनी दी कि विदेशी एसटीईएम ग्रेजुएट्स की संख्या में कमी से अमेरिकी वर्कफोर्स काफी कमजोर हो सकता है।
पत्र में कहा गया, “अगर संयुक्त राज्य अमेरिका में विदेशी एसटीईएम ग्रेजुएट्स की संख्या में एक-तिहाई भी कमी आती है, तो देश अपने उच्च-कुशल एसटीईएम वर्कफोर्स का 6 से 11 प्रतिशत हिस्सा खो सकता है।” इसमें आगे कहा गया कि ऐसी कमी से एक दशक के भीतर अमेरिकी जीडीपी में ‘हर साल 240 डॉलर से 481 डॉलर बिलियन’ की कमी आ सकती है।
सदस्यों ने माना कि प्रशासन विदेशी छात्रों पर ज्यादा कड़ी निगरानी रखना चाहता है और ‘विदेशी विरोधियों को देश के विश्वविद्यालयों का गलत इस्तेमाल करने से रोकना चाहता है’। लेकिन उन्होंने यह तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय छात्र पहले से ही ‘सबसे अच्छी तरह से जांचे-परखे और लगातार निगरानी में रहने वाले गैर-आप्रवासी समूहों’ में से हैं।
सांसदों ने ‘स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफॉर्मेशन सिस्टम’ (एसईवीआईएस) का जिक्र किया, जो ‘डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी’ को विदेशी छात्रों और एक्सचेंज विजिटर्स की ‘लगातार, रियल-टाइम निगरानी’ की सुविधा देता है।
पत्र में कहा गया, “हम आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध करते हैं कि आप ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ को बनाए रखें और वीजा प्रोसेसिंग की ऐसी कुशल नीतियों को सुनिश्चित करें, जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों और विद्वानों के लिए एक स्थिर माहौल को बढ़ावा दें।”
–आईएएनएस
एससीएच/पीएम
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