वाशिंगटन, (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अब ‘गोल्डन एज’ (स्वर्णिम दौर) में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों में लगातार गिरावट, रिकॉर्ड निवेश, शेयर बाजार की मजबूती और रोजगार में बढ़ोतरी इस बात का सबूत है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था तेजी से मजबूत हो रही है।
बुधवार (स्थानीय समय) को नॉर्थ डकोटा के मेडोरा में थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि ऊर्जा की कीमतों में कमी का सीधा फायदा अमेरिका के आम लोगों और कारोबारियों को मिलेगा।
उन्होंने कहा, “तेल की कीमतें लगातार गिर रही हैं। मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई इससे खुश है या दुखी। मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि कीमतें और नीचे आएं। तेल की कीमतें इतनी तेजी से गिर रही हैं, जितनी किसी ने कभी सोची भी नहीं थी।”
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाज इतनी बड़ी संख्या में निकल रहे हैं, जितनी पहले कभी नहीं देखी गई। हम नए रिकॉर्ड बना रहे हैं।
ट्रंप ने अमेरिकी शेयर बाजार और रोजगार के आंकड़ों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और रोजगार के मामले में भी देश ने नया इतिहास बनाया है।
उन्होंने कहा, “हर दिन शेयर बाजार नया रिकॉर्ड बना रहा है। आज हमारे देश में इतिहास के किसी भी दौर की तुलना में सबसे ज्यादा लोग काम कर रहे हैं।”
महंगाई के मुद्दे पर ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को बाइडेन प्रशासन से भारी महंगाई विरासत में मिली थी, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।
ट्रंप ने कहा, “हमें बाइडेन से बहुत बड़ी महंगाई की समस्या मिली थी, लेकिन अब कीमतें लगातार नीचे आ रही हैं।”
संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा, “यह अमेरिका के स्वर्णिम दौर की सिर्फ शुरुआत है। मुझे पूरा विश्वास है कि अमेरिका का सबसे अच्छा समय अभी आना बाकी है।”
हालांकि, ट्रंप का यह भाषण मुख्य रूप से पूर्व राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट की विरासत को समर्पित था, लेकिन उन्होंने अपनी सरकार की आर्थिक नीतियों का जिक्र किया। उनका कहना था कि ऊर्जा की घटती कीमतें, बढ़ता विदेशी निवेश और रोजगार के नए अवसर इस बात का संकेत हैं कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लोगों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।
अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार भी है। ऐसे में अमेरिका की आर्थिक स्थिति, शेयर बाजार, निवेश और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलावों पर भारत भी करीब से नजर रखता है, क्योंकि इनका सीधा असर वैश्विक निवेश, मांग और भारत में आयात होने वाले कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ महंगाई पर भी पड़ता है।
–आईएएनएस
वीकेयू/डीकेपी
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