ईरान के साथ बातचीत को मध्य पूर्व में बड़े बदलाव के तौर पर देख रहा ट्रंप प्रशासन

Summary :

वॉशिंगटन, 22 जून (आईएएनएस)। ईरान के साथ बातचीत को ट्रंप प्रशासन मध्य पूर्व में बड़े बदलाव के तौर पर देख रहा है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि इन बातचीत से मध्य पूर्व में बड़े बदलाव के रास्ते खुल सकते हैं और जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल से ही पूरी नहीं हो पाई थीं, उन महत्वाकांक्षाओं को फिर से बल मिल सकता है। रविवार को स्विट्जरलैंड में वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने ईरान के अधिकारियों से मुलाकात की। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन बातचीत को क्षेत्रीय तनाव कम करने, ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने…

वॉशिंगटन, 22 जून (आईएएनएस)। ईरान के साथ बातचीत को ट्रंप प्रशासन मध्य पूर्व में बड़े बदलाव के तौर पर देख रहा है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि इन बातचीत से मध्य पूर्व में बड़े बदलाव के रास्ते खुल सकते हैं और जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल से ही पूरी नहीं हो पाई थीं, उन महत्वाकांक्षाओं को फिर से बल मिल सकता है।

रविवार को स्विट्जरलैंड में वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने ईरान के अधिकारियों से मुलाकात की। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन बातचीत को क्षेत्रीय तनाव कम करने, ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने और संभवतः अब्राहम समझौते से बने सहयोग के दायरे को बढ़ाने के एक मौके के तौर पर देखा।

जेडी वेंस ने कहा, “राष्ट्रपति ने हमसे ईरान के लोगों के साथ अपने रिश्तों को एक नई दिशा देने के लिए कहा है।” उन्होंने आगे कहा कि अगर ईरान का नेतृत्व क्षेत्रीय अस्थिरता और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ देता है, तो अमेरिका उस देश के साथ अपने रिश्तों को ‘पूरी तरह से बदलने’ के लिए तैयार होगा।

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने प्रशासन के मकसद को लेकर बताया कि इन बातचीत से एक बिल्कुल अलग क्षेत्रीय व्यवस्था के लिए हालात बन सकते हैं।

वाल्ट्ज ने कहा, ‘हमें शांति के लिए एक मौका देना चाहिए।’ उन्होंने आगे कहा, “शायद हम आखिरकार एक नए मध्य पूर्व की ओर बढ़ सकते हैं, जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में अब्राहम समझौते के साथ किया था।”

वाल्ट्ज़ ने अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच बढ़ते सुरक्षा सहयोग की ओर इशारा किया और कहा कि जो घटनाक्रम कभी असंभव माने जाते थे, वे अब हकीकत बन रहे हैं।

उन्होंने कहा, “एक साल पहले भी किसी ने नहीं सोचा होगा कि अब्राहम समझौते के अगले चरण के परिणामस्वरूप इजरायल और यूएई एक-दूसरे की रक्षा के लिए सैन्य रूप से मिलकर काम करेंगे।”

रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी ईरान के साथ बातचीत को एक व्यापक क्षेत्रीय रणनीति से जोड़ा, जो मौजूदा बातचीत से कहीं आगे तक जाती है। ग्राहम ने सीबीएस पर एक इंटरव्यू के दौरान कहा, “हम साल 2026 में अब्राहम समझौते का विस्तार करने जा रहे हैं।”

उन्होंने अनुमान लगाया कि सऊदी अरब आखिरकार उस सामान्यीकरण ढांचे में शामिल हो सकता है जो ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान इजरायल और कई अरब देशों के बीच स्थापित किया गया था।

ग्राहम ने कहा, “हम सऊदी अरब को अब्राहम समझौते में शामिल कराएंगे।” उन्होंने इसे “मध्य पूर्व में 5,000 वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव” बताया।

ग्राहम ने तर्क दिया कि ईरान के साथ कूटनीतिक समझौता व्यापक क्षेत्रीय समझौतों के लिए हालात बनाने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा, “अगर हमें समझौता मिल जाता है, तो ईरान एक तरह से घिर जाएगा। अगर हमें समझौता नहीं मिलता है, तब भी ईरान घिर जाएगा।”

वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिका “बर्बाद हो चुकी ईरानी अर्थव्यवस्था” और “बर्बाद हो चुकी ईरानी सेना” की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बातचीत कर रहा है, साथ ही उसका मुख्य मकसद ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।

प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि इस बातचीत को किसी अंतिम समझौते के बजाय एक बड़ी कूटनीतिक कोशिश के शुरुआती चरण के तौर पर देखा जाना चाहिए।

बता दें कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान हुए ‘अब्राहम समझौते’ ने इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात व बहरीन समेत कई अरब देशों के बीच कूटनीतिक संबंध स्थापित किए। इन समझौतों को दशकों में इस क्षेत्र में हुए सबसे अहम कूटनीतिक बदलावों में से एक माना गया।

–आईएएनएस

एसडी/एएस

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.