आइंडहोवन, 12 मई (आईएएनएस)। एमवी होंडियस सवार यात्रियों और चालक दल को लेकर अंतिम दो निकासी उड़ानें मंगलवार को नीदरलैंड के आइंडहोवन एयर बेस पर उतरीं।
डच विदेश मंत्रालय के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया की ओर से भेजी गई पहली उड़ान में छह यात्री सवार थे। दूसरी उड़ान का संचालन डच सरकार की ओर से किया गया था, जो 22 चालक दल के सदस्यों को लेकर आई। इनमें एक डच नागरिक और 21 अन्य देशों के नागरिक शामिल थे।
पहला विमान स्थानीय समयानुसार लगभग रात 12:30 बजे (सोमवार को 2330 जीएमटी) उतरा। दूसरी डच उड़ान लगभग 15 मिनट बाद उतरी।
डच नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ एंड द एनवायरनमेंट ने रविवार को कहा कि सभी यात्रियों की गहन चिकित्सीय जांच की जाएगी। प्रयोगशाला परीक्षण के लिए हवाई अड्डे पर सभी के नमूने लिए जाएंगे।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, एजेंसी ने कहा कि ऐसे चालक दल के सदस्यों और विदेशी यात्रियों के लिए क्वारंटीन होटल की व्यवस्था की गई है। नियमानुसार फिलहाल ये लोग अपने घर नहीं लौट सकते।
इस बीच, एमवी होंडियस के डच संचालक ‘ओशनवाइड एक्सपीडिशन्स’ ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि जहाज स्पेन के टेनेरिफ द्वीप से रवाना हो चुका है और नीदरलैंड्स के रॉटरडैम की ओर जा रहा है। जहाज को यह यात्रा पूरी करने में लगभग छह दिन लगने की उम्मीद है और इसके इस रविवार तक पहुंचने की संभावना है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हंता वायरस जूनोटिक वायरस हैं, जो प्राकृतिक रूप से रोडेन्ट्स (चूहों आदि) को संक्रमित करते हैं और कभी-कभी इंसानों में भी फैल जाते हैं। इंसानों में संक्रमण गंभीर बीमारी और कई बार मौत का कारण बन सकता है, हालांकि बीमारी का प्रकार वायरस और भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होता है।
अमेरिका महाद्वीप में यह संक्रमण हंता वायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम (एचसीपीएस) का कारण बन सकता है, जो फेफड़ों और हृदय को तेजी से प्रभावित करता है। वहीं यूरोप और एशिया में यह हेमरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (एचएफआरएस) का कारण बनता है, जो मुख्य रूप से गुर्दों और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है।
हालांकि हंता वायरस रोगों का कोई विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है, लेकिन शुरुआती सहायक चिकित्सा देखभाल जीवित रहने की संभावना बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसमें श्वसन, हृदय और गुर्दे संबंधी जटिलताओं की करीबी निगरानी और प्रबंधन शामिल है। बचाव का मुख्य तरीका लोगों और संक्रमित चूहों के बीच संपर्क को कम करना है।
हंता वायरस संक्रमित कृन्तकों (रोडेन्ट्स) के दूषित मूत्र, मल या लार के संपर्क से इंसानों में फैलता है। कुछ मामलों में इन जीवों के काटने से भी संक्रमण हो सकता है, हालांकि ऐसा कम ही होता है।
–आईएएनएस
केआर/
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