वॉशिंगटन, 25 मार्च (आईएएनएस)। पेंटागन अमेरिकी सेना की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों को मध्य पूर्व में तैनात करने की तैयारी कर रहा है, जो ईरान संघर्ष में संभावित बढ़ोतरी का संकेत देता है। हालांकि वॉशिंगटन अभी भी कूटनीतिक विकल्पों की तलाश कर रहा है।
कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के लगभग 3,000 सैनिकों को मध्य पूर्व में तैनात करने की तैयारी की जा रही है, जिससे पहले से ही क्षेत्र की ओर जा रहे हजारों मरीन सैनिकों की संख्या में इजाफा होगा।
अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों को ईरान में प्रवेश करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, सैन्य जमावड़ा इस संभावना को बढ़ाता है कि अमेरिकी बल इस संघर्ष में और गहराई तक शामिल हो सकते हैं।
सीबीएस न्यूज की एक अलग रिपोर्ट में कहा गया है कि 82वीं एयरबोर्न के कुछ हिस्सों जिसमें कमांड इकाइयां और जमीनी बल शामिल हैं, को तैनात किए जाने की उम्मीद है। एक अमेरिकी अधिकारी ने संकेत दिया कि शुरुआती दल 1,500 से कम सैनिकों का हो सकता है।
82वीं एयरबोर्न अमेरिकी सेना की प्रमुख त्वरित-प्रतिक्रिया इकाइयों में से एक है। यह कुछ ही घंटों में दुनियाभर में तैनात हो सकती है। द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इसकी “इमीडिएट रिस्पॉन्स फोर्स” 18 घंटों के भीतर मूव कर सकती है, जिससे व्हाइट हाउस को लचीले सैन्य विकल्प मिलते हैं।
यह सैनिकों की तैनाती ऐसे समय हो रही है जब युद्ध अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। अब तक अमेरिका ने मुख्य रूप से लड़ाकू विमानों, बमवर्षकों और ड्रोन का उपयोग करते हुए हवाई अभियान पर निर्भर किया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, फरवरी के अंत से ईरान के भीतर 9,000 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं। इनमें मिसाइल लॉन्चर, नौसैनिक संसाधन और रक्षा औद्योगिक सुविधाएं शामिल हैं।
क्षेत्र में लड़ाई जारी है। ईरान ने इज़राइल और अन्य देशों पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं जबकि वॉशिंगटन बातचीत के लिए खुलापन दिखा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण तनाव बिंदु बना हुआ है। ईरानी कार्रवाइयों ने इस जलमार्ग तक पहुंच को प्रभावित किया है, जिसके जरिए दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि हुई है।
अमेरिका के पास पहले से ही मध्य पूर्व में लगभग 50,000 सैनिक हैं। अतिरिक्त तैनाती यह संकेत देती है कि व्यापक सैन्य भूमिका पर विचार किया जा सकता है, जिसमें शिपिंग लेनों की सुरक्षा से जुड़े संभावित अभियान शामिल हैं।
द न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सैन्य योजनाकार ऐसे परिदृश्यों पर विचार कर रहे हैं, जिनमें पैराट्रूपर्स को ईरान की मारक दूरी के भीतर तैनात किया जा सकता है। मरीन सैनिकों का उपयोग महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा या रणनीतिक तेल मार्गों के आसपास अभियानों के समर्थन के लिए भी किया जा सकता है।
इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत जारी है। सीबीएस न्यूज के अनुसार, उन्होंने संकेत दिया कि उनके प्रशासन के सदस्य वार्ता में शामिल हैं और तेहरान “समझौता करना चाहता है।”
ईरान ने सार्वजनिक रूप से किसी भी प्रत्यक्ष बातचीत से इनकार किया है और ऐसी रिपोर्टों को “फेक न्यूज” बताया है।
वर्तमान संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिकी और इज़राइली हमलों के साथ शुरू हुआ था, जो ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे थे। तब से यह मिसाइल हमलों, ड्रोन हमलों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरे के साथ एक व्यापक क्षेत्रीय टकराव में बदल गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य इस संकट का केंद्र बना हुआ है। किसी भी लंबी बाधा का वैश्विक तेल बाजारों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जिसमें भारत भी शामिल है, जो इस क्षेत्र से आने वाले ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर है।
–आईएएनएस
पीएम
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