अमेरिका ने क्यूबा के निकेल और मिलिट्री नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाए

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वॉशिंगटन, 18 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिका ने क्यूबा की आठ संस्थाओं और तीन सैन्य अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस कार्रवाई में खास तौर पर क्यूबा के निकेल उद्योग और सैन्य रिसर्च से जुड़ी संस्थाओं को निशाना बनाया गया है। अमेरिका ने विदेशी कंपनियों को भी चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित संस्थाओं के साथ कारोबार करने पर वे भी अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकती हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि इन प्रतिबंधों में निकेल से जुड़ी चार सरकारी कंपनियां, सेना से जुड़ी चार कंपनियां और सैन्य रिसर्च संगठनों का नेतृत्व करने वाले तीन अधिकारी शामिल…

वॉशिंगटन, 18 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिका ने क्यूबा की आठ संस्थाओं और तीन सैन्य अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस कार्रवाई में खास तौर पर क्यूबा के निकेल उद्योग और सैन्य रिसर्च से जुड़ी संस्थाओं को निशाना बनाया गया है। अमेरिका ने विदेशी कंपनियों को भी चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित संस्थाओं के साथ कारोबार करने पर वे भी अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकती हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि इन प्रतिबंधों में निकेल से जुड़ी चार सरकारी कंपनियां, सेना से जुड़ी चार कंपनियां और सैन्य रिसर्च संगठनों का नेतृत्व करने वाले तीन अधिकारी शामिल हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग ने आरोप लगाया कि क्यूबा सरकार खनिजों से होने वाली कमाई का इस्तेमाल आम लोगों की भलाई के बजाय अपने सुरक्षा तंत्र को चलाने के लिए करती है। ये आरोप अमेरिका की ओर से जारी घोषणा में लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों पर क्यूबा की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

रुबियो ने कहा, “कई दशकों से क्यूबा की सरकार देश के सभी संसाधनों को एक छोटे और भ्रष्ट सैन्य वर्ग के हाथों में देती रही है, जबकि आम क्यूबाई लोगों को भरोसेमंद बिजली, खाना और सम्मानजनक जीवन तक नहीं मिल पा रहा है।”

ये प्रतिबंध एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14404 के तहत लगाए गए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह आदेश क्यूबा में दमन और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति के लिए खतरे से जुड़े मामलों में प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है।

सेना से जुड़ी जिन चार संस्थाओं को निशाना बनाया गया है, उनके नाम सिम्परो, सीआईडीएनएवी, सीआईडीएआई और जेलकॉम हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, ये संस्थाएं ट्रेनिंग सिम्युलेटर, नौसेना रिसर्च, पैदल सैनिकों के हथियार, इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन जैसे क्षेत्रों में काम करती हैं।

सिम्परो सिम्युलेटर बनाती और विकसित करती है। साथ ही यह क्यूबा की रिवॉल्यूशनरी आर्म्ड फोर्सेज और दूसरी सरकारी संस्थाओं को ट्रेनिंग देती है। सीआईडीएनएवी क्यूबा की नौसेना के लिए रिसर्च का काम करती है।

सीआईडीएआई पैदल सैनिकों के हथियारों को विकसित करने, खरीदने, आधुनिक बनाने और उनका मूल्यांकन करने से जुड़े काम करती है। वहीं, जेलकॉम इलेक्ट्रॉनिक और कम्युनिकेशन उपकरण बनाती है।

जिन तीन अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें सिम्परोके डायरेक्टर जनरल जोकिन फ्रांसिस्को कैनसियो मोंटेगुडो, सीआईडीएनएवी के डायरेक्टर जनरल डियोग्लिस पेड्रेरा आर्गुएलो और सीआईडीएआई के डायरेक्टर जनरल जूलियो हर्टाडो बेटनकोर्ट शामिल हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग ने कैंसियो मोंटेगुडो और हर्टाडो बेटनकोर्ट को क्यूबा की रिवॉल्यूशनरी आर्म्ड फोर्सेज में सीनियर कर्नल, जबकि पेड्रेरा आर्गुएलो को कैप्टन बताया है।

निकेल उद्योग से जुड़ी जिन चार संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, वे सेरकोनी, सेप्रोनिकेल, सेडिनिक और पिनारेस एस.ए. हैं। इनका काम तकनीकी सेवाओं, इंजीनियरिंग, औद्योगिक रिसर्च और खनिजों से जुड़े भूवैज्ञानिक सर्वे जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है।

सेरकोनी निकेल उद्योग को उपकरण और सेवाएं देती है।

अमेरिकी विदेश विभाग की फैक्ट शीट के मुताबिक, सेप्रोनिकेल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट पर काम करती है और सरकार की ओर से चलाए जाने वाले खनिज निकालने के काम में तालमेल बैठाती है।

सेडिनिक इस सेक्टर में रिसर्च, डेवलपमेंट और नई तकनीक से जुड़े काम में मदद करती है। पिनारेस एस.ए. क्यूबा में मौजूद खनिज भंडारों का भूवैज्ञानिक सर्वे करती है।

अमेरिकी विदेश विभाग ने निकेल को क्यूबा सरकार के लिए विदेशी मुद्रा कमाने का एक जरिया बताया। विभाग का आरोप है कि इससे होने वाली कमाई सरकार को चलाने में मदद करती है, लेकिन आम जनता को इसका फायदा नहीं मिलता।

घोषित प्रतिबंधों के तहत, प्रतिबंधित लोगों और संस्थाओं की अमेरिका में मौजूद संपत्ति या ऐसी संपत्ति जो किसी अमेरिकी व्यक्ति के नियंत्रण में है, उसे फ्रीज कर दिया जाएगा। ऐसी संपत्तियों की जानकारी अमेरिकी वित्त मंत्रालय के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएएसी) को देनी होगी।

अगर किसी संस्था में प्रतिबंधित व्यक्ति या व्यक्तियों की सीधे या मिलकर कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है, तो उस संस्था पर भी प्रतिबंध लागू होगा।

अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, बिना खास अनुमति या छूट के अमेरिकी नागरिक या अमेरिका के भीतर कोई व्यक्ति प्रतिबंधित लोगों या संस्थाओं की संपत्ति से जुड़े लेन-देन नहीं कर सकता।

फैक्ट शीट में विदेशी लोगों और वित्तीय संस्थानों को भी प्रतिबंधित पक्षों के साथ कारोबार करने को लेकर चेतावनी दी गई है। इसमें कहा गया है कि अगर कोई प्रतिबंधित व्यक्ति या संस्था की संपत्ति उसे वापस करता है या उस संपत्ति को ऐसी जगह भेजता है जहां बाद में वह उसका इस्तेमाल कर सके, तो ऐसा करने वाले पर भी अमेरिकी प्रतिबंध लगने का खतरा हो सकता है।

वॉशिंगटन ने कहा कि इन प्रतिबंधों का मकसद व्यवहार में बदलाव लाना है। जिन लोगों या संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, वे अमेरिकी वित्त मंत्रालय की दोबारा विचार करने की प्रक्रिया के जरिए अपना नाम प्रतिबंध सूची से हटाने की मांग कर सकते हैं।

–आईएएनएस

एवाई/एएस

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IANS Agency

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