वाशिंगटन, 4 नवंबर (आईएएनएस)। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुधवार को कहा कि मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की हार का सबसे बड़ा कारण ईरान के साथ चल रहा युद्ध था। उन्होंने कहा कि 2024 में डोनाल्ड ट्रंप और उन्हें वोट देने वाले कई मतदाताओं ने 2026 के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन कर दिया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किए गए एक लंबे पोस्ट में वेंस ने चुनावी हार का खुलकर विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी के आंतरिक आंकड़े शुरू में यह संकेत दे रहे थे कि पार्टी के समर्थक अच्छी संख्या में मतदान कर रहे हैं और बड़ी हार से बचा जा सकता है लेकिन असल समस्या मतदान प्रतिशत नहीं थी। असली समस्या यह थी कि 2024 में ट्रंप-वेंस को वोट देने वाले कई लोगों ने 2026 में डेमोक्रेट्स को वोट दिया।
वेंस के मुताबिक, रिपब्लिकन रणनीतिकार लगातार मतदाताओं के रुझान पर नजर रख रहे थे और उसकी तुलना 2024 में ट्रंप-वेंस गठबंधन को जिताने वाले वोटर आधार से कर रहे थे। उन्होंने बताया कि कुछ राज्यों में मतदान सामान्य रहा जबकि कुछ जगहों पर काफी अधिक मतदान हुआ। इसके बावजूद एक डेटा विश्लेषक ने उन्हें पहले ही चेतावनी दी थी कि ज्यादा मतदान का मतलब यह नहीं है कि वोट रिपब्लिकनों को ही मिलेंगे।
वेंस ने बताया कि विश्लेषक ने कहा था, “हमारे समर्थक मतदान तो कर रहे हैं लेकिन जरूरी नहीं कि वे हमें ही वोट दें।” उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक चुनाव विशेषज्ञ ने मतदान से पहले उन्हें चेतावनी दी थी कि रिपब्लिकन पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के चुनावों में लगभग 13 प्रतिशत अंकों से पीछे रह सकती है।
उस सर्वेक्षण के अनुसार, 2024 में ट्रंप को वोट देने वाले लेकिन अब नाराज मतदाताओं ने चार प्रमुख मुद्दों का उल्लेख किया- युद्ध खत्म करना, महंगाई और जीवन यापन की लागत की समस्या को सुलझाना, ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति अपनाना और इजरायल के साथ वाशिंगटन के संबंधों में बदलाव लाना।
वेंस ने कहा, “हमारे समर्थक मतदान केंद्र तक पहुंचे लेकिन इन्हीं कारणों से उनमें से कई लोगों ने डेमोक्रेट्स को वोट दिया।” हालांकि उन्होंने उस सर्वेक्षण से जुड़ी विस्तृत जानकारी, जैसे नमूना आकार या सर्वे की तारीखें साझा नहीं कीं। वेंस ने माना कि कुछ लोग यह कह रहे हैं कि रिपब्लिकन पार्टी चुनाव के अंतिम चरण में आर्थिक मुद्दों को प्रभावी ढंग से लोगों तक नहीं पहुंचा पाई। उनके मुताबिक हार का मुख्य कारण फिर भी युद्ध ही था।
उन्होंने लिखा, “हम इसलिए हारे क्योंकि युद्ध लोगों को पसंद नहीं था। राष्ट्रपति ने भी कल रात यही बात कही।” चुनाव के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को बताया कि रिपब्लिकन हार में ईरान एक महत्वपूर्ण कारण रहा। वॉल स्ट्रीट जर्नल के साथ एक अलग साक्षात्कार में, हालांकि उन्होंने सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें इस फैसले पर पछतावा नहीं है।
वेंस ने युद्ध समर्थकों से कहा कि उन्हें यह स्वीकार करना चाहिए कि इस संघर्ष की राजनीतिक कीमत पार्टी को चुकानी पड़ी है। उनका कहना था कि यदि पार्टी छह साल के लिए सीनेट में सीटें खो देती है, तो युद्ध का समर्थन करने वालों को इसका जवाब भी देना चाहिए। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर उन आवाजों की भी आलोचना की जो हार का कारण आव्रजन नीति को बता रही हैं।
वेंस ने कहा कि अवैध रूप से काम करने वाले लोगों को नौकरी देने वाले नियोक्ताओं पर सख्ती बढ़ाने जैसे उपायों पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन अवैध प्रवासियों को सामान्य माफी (एमनेस्टी) देना चुनावी हार का समाधान नहीं है। उन्होंने निराश रिपब्लिकन समर्थकों से अपील की कि वे पार्टी से दूरी बनाने के बजाय भविष्य के चुनावों पर ध्यान दें और राजनीतिक रूप से सक्रिय बने रहें।
सीबीएस न्यूज के अनुमानों के अनुसार, मंगलवार को हुए मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया। पार्टी ने नॉर्थ कैरोलाइना, टेक्सास, ओहायो, कैनसस और साउथ कैरोलिना जैसे राज्यों में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की, जिससे सीनेट में रिपब्लिकन बहुमत खत्म हो गया।
ये चुनाव ट्रंप के दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल के बीच आयोजित हुए। फरवरी में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल समर्थित ईरान संघर्ष का असर क्षेत्रीय व्यापार, तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजारों पर पड़ा। बढ़ती ईंधन कीमतें और रोजमर्रा के खर्च चुनाव के दौरान प्रमुख मुद्दे बने रहे।
वेंस का मानना है कि इन्हीं वजहों से कई मतदाता रिपब्लिकन पार्टी से नाराज हुए और उन्होंने डेमोक्रेट्स की ओर रुख किया।
–आईएएनएस
एवाई/पीएम
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