एआई सीक्रेट्स पर चीन की नजर! अमेरिका ने आर्थिक जासूसी, साइबर ऑपरेशन को लेकर दी चेतावनी

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वाशिंगटन, 27 जून (आईएएनएस)। अमेरिका के सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि चीन आर्थिक जासूसी, साइबर ऑपरेशन और व्यापारिक निवेश के जरिए अमेरिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी और दूसरी उन्नत तकनीक हासिल करने की कोशिशें तेज कर रहा है। उन्होंने इस कैंपेन को राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व, दोनों के लिए बढ़ता खतरा बताया है। यह चेतावनी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर हाउस सेलेक्ट कमेटी की सुनवाई के दौरान आई, जहां डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के पूर्व कार्यवाहक निदेशक डेविड शेड ने कहा कि बीजिंग ने अमेरिकी कमर्शियल और टेक्नोलॉजिकल सीक्रेट्स हासिल करने के लिए एक बड़ा सिस्टम बनाया है। शेड ने…

वाशिंगटन, 27 जून (आईएएनएस)। अमेरिका के सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि चीन आर्थिक जासूसी, साइबर ऑपरेशन और व्यापारिक निवेश के जरिए अमेरिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी और दूसरी उन्नत तकनीक हासिल करने की कोशिशें तेज कर रहा है। उन्होंने इस कैंपेन को राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व, दोनों के लिए बढ़ता खतरा बताया है।

यह चेतावनी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर हाउस सेलेक्ट कमेटी की सुनवाई के दौरान आई, जहां डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के पूर्व कार्यवाहक निदेशक डेविड शेड ने कहा कि बीजिंग ने अमेरिकी कमर्शियल और टेक्नोलॉजिकल सीक्रेट्स हासिल करने के लिए एक बड़ा सिस्टम बनाया है।

शेड ने प्रतिनिधियों से कहा, “यह कैंपेन जिसमें साइबर जासूसी, ह्यूमन इंटेलिजेंस, एकेडमिक सहयोग और कमर्शियल इन्वेस्टमेंट शामिल हैं, चीन की तेजी से आर्थिक और सैन्य बढ़त में अहम रहा है।”

उन्होंने कहा कि चीन ने संवेदनशील तकनीक हासिल करने के लिए साइबर जासूसी, इंटेलिजेंस ऑपरेशन, एकेडमिक पार्टनरशिप और कमर्शियल निवेश को मिलाकर खुद को एक ग्लोबल तकनीकी शक्ति में बदल लिया है।

शेड के अनुसार, बीजिंग की इंटेलिजेंस एजेंसियां ​​आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेलीकम्युनिकेशन, बायोटेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग और एडवांस्ड वेपन सिस्टम जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों, विश्वविद्यालयों और रिसर्चर को टारगेट करती हैं।

उन्होंने कहा, “कॉर्पोरेट अमेरिका, प्रोफेसर, एकेडमिक रिसर्चर, सभी सही टारगेट हैं। चीन की इंटेलिजेंस सर्विस का साइज और काबिलियत बहुत बढ़ गई है।”

सुनवाई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर उभरती चिंताओं पर भी फोकस किया गया। सीनेटरों ने उन रिपोर्ट्स का जिक्र किया जिनमें कहा गया था कि चीनी तकनीक की बड़ी कंपनी अलीबाबा ने यूएस एआई कंपनी एंथ्रोपिक को “डिस्टिलेशन” अटैक के जरिए टारगेट किया था, जिसे एडवांस्ड एआई मॉडल्स से जानकारी निकालने के लिए डिजाइन किया गया था।

इस तकनीक को लेकर शेड ने कहा कि इसमें महंगे एआई मॉडल से डेटा को आसान बनाना शामिल है ताकि उन्हें बहुत कम लागत पर दोबारा बनाया जा सके।

उन्होंने कहा, “इससे चीनी कंपनियां उन बड़े एआई उद्यमों द्वारा अमेरिका में किए गए भारी निवेश को दरकिनार करने में सक्षम हो जाती हैं।” उनका तर्क था कि यह तरीका चीनी कंपनियों को वर्षों के महंगे शोध एवं विकास (आरएंडडी) की प्रक्रिया को पीछे छोड़ते हुए तेजी से आगे बढ़ने (लीपफ्रॉग) का अवसर देता है।

शेड ने अमेरिकी तकनीक के “क्राउन ज्वेल्स” के तौर पर बताई गई चीजों की मजबूत सुरक्षा की अपील की और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की सुरक्षा के लिए सरकार और उद्योग के बीच ज्यादा सहयोग की अपील की।

जब उनसे पूछा गया कि चीनी असर वाले ऑपरेशन्स की लागत बढ़ाने के लिए कांग्रेस तुरंत क्या कर सकती है, तो उन्होंने टिकटॉक से जुड़ी चिंताओं की ओर इशारा किया और कहा कि प्लेटफॉर्म पर प्रभाव डालने वाले मौजूदा कानून को लागू करने से बीजिंग को एक जरूरी संकेत जाएगा, साथ ही यूजर डेटा तक पहुंच सीमित हो जाएगी।

सुनवाई के दौरान वाशिंगटन में इस बात पर बढ़ती चिंता दिखाई गई कि चीन के साथ तकनीकी कॉम्पिटिशन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बीच बड़ी रणनीतिक दुश्मनी का केंद्र बन गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर तकनीक, क्वांटम कंप्यूटिंग और बायोटेक्नोलॉजी को कमर्शियल और सैन्य दोनों तरह के इस्तेमाल वाले जरूरी क्षेत्र के तौर पर देखा जा रहा है।

–आईएएनएस

केके/एएस

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