डब्ल्यूएचओ का दावा- कांगो में तेजी से पांव पसार रहा इबोला, युगांडा तक फैली बीमारी

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जिनेवा, 9 जून (आईएएनएस)। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। कांगो में इबोला के मामलों की संख्या बढ़ रही है। यह बड़े इलाके में फैल रहा है और युगांडा तक सीमा पार पांव पसार रहा है। डब्ल्यूएचओ ने इस मामले में ताजा अपडेट शेयर करते हुए कहा है कि डीआरसी के लिए रिस्क बहुत ज्यादा है। युगांडा सहित कांगो के उन पड़ोसी देशों के लिए, जो प्रभावित क्षेत्रों के साथ अपनी जमीनी सीमाएं साझा करते हैं, क्षेत्रीय स्तर पर यह जोखिम अधिक है। हालांकि, संगठन के…

जिनेवा, 9 जून (आईएएनएस)। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। कांगो में इबोला के मामलों की संख्या बढ़ रही है। यह बड़े इलाके में फैल रहा है और युगांडा तक सीमा पार पांव पसार रहा है।

डब्ल्यूएचओ ने इस मामले में ताजा अपडेट शेयर करते हुए कहा है कि डीआरसी के लिए रिस्क बहुत ज्यादा है। युगांडा सहित कांगो के उन पड़ोसी देशों के लिए, जो प्रभावित क्षेत्रों के साथ अपनी जमीनी सीमाएं साझा करते हैं, क्षेत्रीय स्तर पर यह जोखिम अधिक है। हालांकि, संगठन के अनुसार, शेष अफ्रीकी क्षेत्रों और वैश्विक स्तर पर इबोला संक्रमण का खतरा फिलहाल ‘कम’ बना हुआ है।

रविवार तक, डीआरसी ने इबोला के 515 कन्फर्म केस बताए हैं, जिनमें 91 मौतें शामिल हैं। युगांडा ने 19 कन्फर्म मामले बताए हैं, जिनमें दो मौतें और एक संभावित जानलेवा मामला शामिल है। युगांडा में सभी मामले महामारी विज्ञान के दृष्टिकोण से डीआरसी में इबोला के फैलने से जुड़े हुए हैं, जिसमें बाहर से आए संक्रमण और कॉन्टैक्ट और स्वास्थ्य श्रमिकों के बीच सेकेंडरी ट्रांसमिशन, दोनों के सबूत हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अन्य साझेदारों के सहयोग से प्रकोप से निपटने के लिए कई कदम उठा रहे हैं। 5 जून को अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) और डब्ल्यूएचओ ने संयुक्त रूप से महाद्वीपीय स्तर की इबोला तैयारी और प्रतिक्रिया योजना शुरू की। इस योजना के तहत 51.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि अफ्रीकी देशों को प्रकोप की तैयारी, समय रहते पहचान और प्रभावी प्रतिक्रिया देने में सहायता मिल सके।

इस बीमारी का कारण बुंडीबुग्यो वायरस बीमारी (बीवीडी) है, जो इबोला बीमारी का एक गंभीर और अक्सर जानलेवा रूप है। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने बताया कि माना जाता है कि यह वायरस फ्रूट बैट से पैदा होता है और संक्रमित जानवरों के खून या स्राव या संक्रमित लोगों के बॉडी फ्लूइड के पास जाने से फैल सकता है।

बीवीडी का इन्क्यूबेशन पीरियड दो से 21 दिनों का होता है और संक्रमित लोग तब तक इस बीमारी को नहीं फैलाते जब तक उनमें लक्षण न दिखें।

इबोला ऑर्थोइबोलावायरस से होने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो फिलोविरिडे परिवार का हिस्सा है और इंसानों और दूसरे प्राइमेट्स में होती है। इस बीमारी की पहचान 1976 में जैरे (डीआरसी) और सूडान (अब दक्षिण सूडान) में लगभग एक साथ फैलने से हुई थी।

इबोला वायरस के बुंडीबुग्यो की वजह से अभी जो बीमारी फैली है, उसका आधिकारिक तौर पर 15 मई को ऐलान किया गया था। हालांकि बुंडीबुग्यो वेरिएंट, पिछले कई आउटब्रेक के लिए जिम्मेदार जैरे स्ट्रैन से कम समान्य है, फिर भी यह गंभीर बीमारी और मौत का कारण बन सकता है।

–आईएएनएस

केके/एएस

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