नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने अपनी मासिक रिपोर्ट में दावा किया है कि ईरान संघर्ष का असर तेल उत्पादन पर पड़ा है। एजेंसी ने ऑयल मार्केट रिपोर्ट- मई 2026 में कहा कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण मध्य पूर्व में तेल उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे इस वर्ष वैश्विक तेल आपूर्ति मांग को पूरा नहीं कर पाएगी।
रिपोर्ट कहती है कि मध्य पूर्व में युद्ध शुरू होने के दस सप्ताह से अधिक समय बाद, होर्मुज से तेल आपूर्ति में कई तरह के पेंच फंसे हैं, जो वैश्विक तेल भंडार को रिकॉर्ड गति से घटा रही है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने को लेकर समझौते की संभावनाओं पर मिल रहे विरोधाभासी संकेतों के कारण वैश्विक तेल कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया।
आईईए ने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकरों की आवाजाही अब भी सीमित है। खाड़ी क्षेत्र के उत्पादकों से कुल आपूर्ति हानि पहले ही 1 अरब बैरल से अधिक हो चुकी है और प्रतिदिन 1.4 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल उत्पादन बंद पड़ा है। आपूर्ति के लिहाज से ये बहुत बड़ा झटका है।”
रिपोर्ट असमान कीमतों की ओर भी इशारा करती है। इसके मुताबिक, नॉर्थ सी डेटेड कच्चे तेल की कीमत पहले 144 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची, फिर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गई और बाद में दोबारा बढ़कर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। रिपोर्ट लिखे जाने तक दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और युद्ध समाप्त करने को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी।
अनुमान के अनुसार, इस वर्ष की तीसरी तिमाही से होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल टैंकरों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य हो सकती है।
आईईए ने कहा कि युद्ध के कारण 2026 में वैश्विक तेल आपूर्ति में लगभग 39 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) की गिरावट आएगी। इससे पहले एजेंसी ने 15 लाख बैरल प्रतिदिन की गिरावट का अनुमान लगाया था। मार्च और अप्रैल के दौरान वैश्विक तेल भंडार में कुल 25 करोड़ बैरल यानी लगभग 40 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी दर्ज की गई।
वहीं, एजेंसी ने अब इस वर्ष तेल मांग में 4.2 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी का अनुमान जताया है, जबकि पहले यह अनुमान 80,000 बैरल प्रतिदिन की गिरावट का था।
आईईए के अनुसार, युद्ध के कारण तेल कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे मांग में कमी और वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी होने का खतरा बढ़ गया है। आईईए के मुताबिक, ऊंची तेल कीमतें, कमजोर होती वैश्विक अर्थव्यवस्था और ईंधन बचत उपाय आने वाले समय में वैश्विक तेल खपत पर और दबाव डालेंगे।
–आईएएनएस
केआर/
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