वॉशिंगटन, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह जन्मसिद्ध नागरिकता पर सुनवाई के लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित होने की योजना बना रहे हैं। शीर्ष अदालत इस मुद्दे पर उनके कार्यकारी आदेश को चुनौती देने वाले एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले की सुनवाई करने जा रही है।
ट्रंप ने अदालत में उपस्थित होने के बारे में पूछे जाने पर कहा, “मुझे लगता है हाँ, मैं जाऊँगा क्योंकि मैं इस तर्क को लंबे समय से सुनता आ रहा हूँ।”
यह मामला ट्रंप के उस प्रयास पर केंद्रित है, जिसमें वे गैर-नागरिक माता-पिता के अमेरिका में जन्मे बच्चों को स्वतः नागरिकता देने की व्यवस्था को समाप्त करना चाहते हैं- जो 14वें संशोधन पर आधारित एक लंबे समय से चली आ रही संवैधानिक व्याख्या है।
ट्रंप ने अपने तर्क को ऐतिहासिक संदर्भ में रखते हुए जन्मसिद्ध नागरिकता को गृहयुद्ध के बाद के दौर से जोड़ा। उन्होंने कहा, “यह दासों के बारे में था और यह दासों के बच्चों व उनके संरक्षण से संबंधित था।”
उन्होंने तर्क दिया कि इस नीति का वर्तमान उपयोग उसके मूल उद्देश्य से भटक गया है। ट्रंप ने कहा, “यह करोड़पतियों और अरबपतियों के बच्चों को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए नहीं था।”
मौजूदा व्यवस्था को त्रुटिपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा, “यह सबसे अजीब चीज़ है जो मैंने कभी देखी है। वर्षों से इसे कानूनी लोगों द्वारा बहुत खराब तरीके से संभाला गया है।”
ट्रंप ने इस नीति के दुरुपयोग की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, “हम ऐसे लोगों को देख रहे हैं…जिन्हें कहा जाता है, बधाई हो, आपका पूरा परिवार अब अमेरिका का नागरिक बनने जा रहा है।”
राष्ट्रपति ने अपने कानूनी पक्ष पर भरोसा जताया लेकिन न्यायिक फैसलों को लेकर चिंता भी व्यक्त की। डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों द्वारा नियुक्त न्यायाधीशों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “आपके पास सबसे मजबूत मामला हो सकता है…फिर भी वे आपके खिलाफ फैसला दे सकते हैं।”
इसके विपरीत, उन्होंने रिपब्लिकन द्वारा नियुक्त न्यायाधीशों के बारे में कहा कि वे अक्सर “यह दिखाना चाहते हैं कि वे कितने सम्मानित हैं” और स्वतंत्र रूप से निर्णय लेते हैं।
हाल के वर्षों में यह मुद्दा काफी राजनीतिक हो गया है, जहां रिपब्लिकन सख्त प्रतिबंधों की वकालत कर रहे हैं, जबकि डेमोक्रेट्स इसे एक मौलिक संवैधानिक अधिकार मानकर बचाव कर रहे हैं।
1868 में गृहयुद्ध के बाद पारित 14वें संशोधन ने जन्मसिद्ध नागरिकता को स्थापित किया, ताकि पूर्व दासों और उनके वंशजों को अमेरिकी नागरिक के रूप में मान्यता मिल सके।
कानूनी विशेषज्ञ लंबे समय से इस संशोधन के दायरे पर बहस करते रहे हैं लेकिन अदालतों ने ऐतिहासिक रूप से इसकी व्यापक व्याख्या को बरकरार रखा है, जिससे किसी भी बदलाव को कड़ी न्यायिक जांच का सामना करना पड़ता है।
–आईएएनएस
पीएम
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