रूस के पड़ोसी चार देशों के राष्ट्रपतियों ने बुधवार को संकटग्रस्त यूक्रेन का दौरा किया और उसे समर्थन का एहसास दिलाया। इस दौरान राष्ट्रपतियों ने रूसी हमलों में क्षतिग्रस्त हुई इमारतों को देख रूस से युद्ध अपराधों के लिए जवाबदेही की मांग की। पोलैंड, लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया के राष्ट्रपतियों की यात्रा नाटो के पूर्वी हिस्से के देशों की एकजुटता का एक मजबूत प्रदर्शन थी। इनमें से तीन पहले यूक्रेन की तरह सोवियत संघ का हिस्सा थे।
चार देशों के राष्ट्रपतियों ने किया संकटग्रस्त यूक्रेन का दौरा
इन नेताओं ने राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से मिलने के लिए यूक्रेन की राजधानी कीव में ट्रेन से यात्रा की। इसके बाद उन्होंने बोरोड्यांका इलाके का दौरा किया, जहां रूसी सैनिकों द्वारा किए गए अत्याचार के सबूत मिले हैं। लिथुआनिया के राष्ट्रपति गीतानास नौसेदा ने रूस से तेल और गैस की खरीद और देश के सभी बैंकों के खिलाफ सख्त प्रतिबंधों का आह्वान करते हुए कहा ‘‘यूरोप के भविष्य के लिए लड़ाई यहां हो रही है।’’
महायुद्ध में दोनों देशों का हो रहा नुक्सान
अब तक हुए युद्धों की सबसे महत्वपूर्ण लड़ाइयों में से एक में रूस ने कहा कि एक हजार से अधिक यूक्रेनी सैनिकों ने मारियुपोल के, घिरे हुए दक्षिणी बंदरगाह में आत्मसमर्पण कर दिया था। यूक्रेन के एक अधिकारी ने दावे का खंडन किया जिसे सत्यापित नहीं किया जा सका। पश्चिमी अधिकारियों के अनुसार, 24 फरवरी को रूस ने कीव पर कब्जा करने, सरकार गिराने और एक अनुकूल माहौल स्थापित करने के लक्ष्य से यूक्रेन पर आक्रमण किया था। लेकिन जमीनी हकीकत धीरे-धीरे बदलने लगी। रूस ने संभावित रूप से अपने हजारों सैनिकों को युद्ध में खो दिया। वहीं, संघर्ष में अनगिनत यूक्रेनी नागरिकों को भी मौत को गले लगाना पड़ा।
यूक्रेन से पलायन करने पर मजबूर है लोग
इस दौरान लाखों लोग अपना देश छोड़कर पलायन करने के लिए मजबूर हो गए। युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी झकझोर दिया, साथ ही वैश्विक खाद्य आपूर्ति को खतरे में डाल दिया और यूरोप के शीत युद्ध के बाद के संतुलन को तोड़ दिया है। बुधवार को कीव के ऐतिहासिक मरिंस्की पैलेस के एक कमरे में जेलेंस्की के साथ दिखाई दिए, नौसेदा, एस्टोनियाई राष्ट्रपति अलार कारिस, पोलैंड के आंद्रेज डूडा और लातविया के एगिल्स लेविट्स ने यूक्रेन को राजनीतिक रूप से और सैन्य सहायता के साथ समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
महायुद्ध के लिए रूस है पूरी तरह से जिम्मेदार
उन्होंने कहा ”हम इस इतिहास को जानते हैं। हम जानते हैं कि रूसी कब्जे का क्या मतलब है। हम जानते हैं कि रूसी आतंकवाद का क्या मतलब होता है।” उन्होंने कहा कि युद्ध अपराध करने वालों और आदेश देने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। अपने प्रतिदिन होने वाले संबोधन में बुधवार को जेलेंस्की ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) के अभियोजक करीम खान ने बुधवार को बुका के कीव उपनगर का दौरा किया, जहां 400 से अधिक शव पाए गए, क्योंकि आईसीसी की जांच चल रही है। रूसी सेना के पीछे हटने के बाद वहां नागरिकों की सामूहिक हत्याओं के सबूत मिले थे। जेलेंस्की ने कहा, ‘‘यह अनिवार्य है कि रूसी सैनिकों को जिम्मेदार ठहराया जाए। केवल बुका में जो किया गया था, उसके लिए नहीं बल्कि हर चीज के लिए, हम सभी को न्यायाधिकरण में घसीटेंगे।”


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