Trump 100 Percent Tarrif : अमरीकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रूस पर शिकंजा कसने वाले प्रतिबंध बिल को लेकर अमेरिका के नेताओं में चर्चा तेज होने लगी है, पर दिक्कत यह कि इस बिल पर चर्चा होना भारत के लिए चिंता का सबब बन रहा है।
3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों की छुट्टियों से पहले संसद के पास सिर्फ 4 कामकाजी दिन बचे हैं। ऐसे में बिल पर कई अहम अमेंडमेंट पेश किए गए हैं। अब बिल रूस के खिलाफ प्रतिबन्ध पर है मगर इस का असर भारत पर क्यों है इसे समझिए। दरअसल, संशोधन में रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में भारत और चीन का नाम सीधे तौर पर शामिल करने की मांग की गई है, ताकि उन पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जा सके। वहीं दूसरे ग्रुप ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ लगाने के बेलगाम अधिकार देने का विरोध करते हुए इस पूरे सेक्शन को ही हटाने की सिफारिश कर दी है। बता दें
लिंडसे ग्राहम बिल का खाका

अमेरिकी सीनेट ने पिछले महीने 7 अगस्त को ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ को 86-11 के भारी बहुमत से पास किया था। इस बिल का मकसद रूस के एनर्जी सेक्टर, उसकी लीडरशिप और तेल सप्लाई में इस्तेमाल होने वाले ‘शैडो फ्लीट’ पर कड़े प्रतिबंध लगाना है। अमेरिका का मानना है कि रूस अपने कच्चे तेल के कारोबार से यूक्रेन युद्ध की फंडिंग कर रहा है।
सीनेट से पास बिल में सीधे देशों के नाम नहीं थे, बल्कि तेल आयात करने वाले 5 बड़े देशों पर राष्ट्रपति को 100% टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया था। अब डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर ने संशोधन पेश कर भारत, चीन, तुर्की, यूएई, सिंगापुर और कजाकिस्तान जैसे देशों का नाम लिस्ट में स्पष्ट जोड़ने की मांग की है।
टैरिफ सेक्शन हटाने की भी उठी मांग
दूसरी तरफ, डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स ने ट्रंप को बड़े टैरिफ अधिकार देने का विरोध किया है। उन्होंने बिल से सेक्शन 113 को पूरी तरह हटाने के लिए संशोधन पेश किया है। इसके अलावा मिक्स ने सदन में यह प्रस्ताव रखा है कि देशों को 90 दिनों की छूट दी जाए।
मीक्स ने यह भी प्रस्ताव रखा कि अगर अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में जरूरी हो, तो राष्ट्रपति किसी भी देश या व्यक्ति को 90 दिनों के लिए प्रतिबंधों से छूट दे सकें। इसके अलावा उन्होंने यूक्रेन को रक्षा उपकरण खरीदने के लिए 15 अरब डॉलर का सीधा लोन देने का अमेंडमेंट भी पेश किया है।
4 दिन में क्या होगा
हाउस रूल्स कमेटी ने सोमवार को इन सभी संशोधनों को सार्वजनिक किया। अब देखना होगा कि 4 दिनों के भीतर बिल किस रूप में पास होकर राष्ट्रपति के दस्तखत के लिए जाता है।


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