नेपाल त्रासदी: सांसद सुब्रमण्यम ने यूएसएआईडी फंडिंग कटौती पर उठाए सवाल, बोले-अर्ली वार्निंग सिस्टम जरूरी

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वॉशिंगटन, 11 सितंबर (आईएएनएस)। नेपाल की व‍िनाशकारी बाढ़ में जान गंवाने वालों और अपनों का इंतजार कर रहे पीड़ित पर‍िवारों के ल‍िए उत्तरी वर्जीनिया में प्रार्थना सभा की गई। लोगों ने मोमबत्‍ति‍यां जलाकर हादसे में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम भी मौजूद रहे। आईएएनएस से बातचीत करते हुए सुहास सुब्रमण्यम ने कहा क‍ि हमें अभी भी ठीक-ठीक नहीं पता कि क्या हुआ है, कौन-कौन लापता हैं और इस समय किन लोगों को ढूंढ पाना संभव है। इतना समय बीत चुका है कि अब हम किसी चमत्कार की उम्मीद कर रहे…

वॉशिंगटन, 11 सितंबर (आईएएनएस)। नेपाल की व‍िनाशकारी बाढ़ में जान गंवाने वालों और अपनों का इंतजार कर रहे पीड़ित पर‍िवारों के ल‍िए उत्तरी वर्जीनिया में प्रार्थना सभा की गई। लोगों ने मोमबत्‍ति‍यां जलाकर हादसे में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम भी मौजूद रहे।

आईएएनएस से बातचीत करते हुए सुहास सुब्रमण्यम ने कहा क‍ि हमें अभी भी ठीक-ठीक नहीं पता कि क्या हुआ है, कौन-कौन लापता हैं और इस समय किन लोगों को ढूंढ पाना संभव है। इतना समय बीत चुका है कि अब हम किसी चमत्कार की उम्मीद कर रहे हैं या फिर कम से कम परिवारों को कुछ स्पष्ट जवाब मिल जाएं, यही प्रार्थना कर रहे हैं।

राहत और बचाव अभ‍ियान में चुनौत‍ियों के सवाल पर सुब्रमण्यम ने कहा क‍ि स्थिति इसलिए और मुश्किल हो जाती है क्योंकि मामला नेपाल से जुड़ा है, जहां रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था हमेशा बहुत व्यवस्थित नहीं होती। साथ ही, वहां के अधिकारी भी एक बेहद कठिन राहत और बचाव अभियान में व्यस्त हैं। दूसरी तरफ चीन भी इसमें एक महत्वपूर्ण पक्ष है और उसके बारे में अक्सर कहा जाता है कि वह हर जानकारी पूरी तरह खुलकर साझा नहीं करता। इन दोनों वजहों से हालात और जटिल हो जाते हैं।

उन्‍होंने कहा क‍ि मैं जानता हूं कि कई स्थानीय नेता मेरे साथ मिलकर अमेरिकी विदेश मंत्रालय और रक्षा विभाग पर लगातार दबाव बना रहे हैं, ताकि राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों को सबसे आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जा सकें।

अब उनके पास ये उपकरण हैं लेकिन शुरुआत में ऐसा नहीं था, जो अपने आप में एक दुखद बात थी। अब जब जरूरी उपकरण पहुंच चुके हैं, तो हम चाहते हैं कि खोज और बचाव अभियान पूरी गंभीरता और विस्तार से चलाया जाए। साथ ही, हमारी कोशिश है कि कम से कम परिवारों को अपने प्रियजनों के बारे में कोई निश्चित जानकारी मिल सके।

सुब्रमण्यम ने कहा क‍ि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए हमें अभी से कदम उठाने होंगे। हमने इस क्षेत्र में यूएसएआईडी की फंडिंग में कटौती कर दी है। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी करने और उन्हें रोकने से जुड़े कार्यक्रमों की फंडिंग भी कम कर दी गई है। इसका असर आगे चलकर हमें भुगतना पड़ सकता है। सिर्फ इस घटना में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में होने वाली कई दूसरी आपदाओं में भी। हमें ऐसे कार्यक्रमों में पहले से निवेश करना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय उनकी फंडिंग घटा दी गई।

उन्‍होंने कहा क‍ि मैं इस मुद्दे को राजनीतिक रूप नहीं देना चाहता, लेकिन यह समझना जरूरी है कि भले ही ऐसी त्रासदियां कई बार किसी के नियंत्रण से बाहर होती हैं, फिर भी हमारे पास ऐसे संसाधन हैं जिनसे भविष्य में होने वाली आपदाओं के नुकसान को कम किया जा सकता है।

कम से कम हमारे पास ऐसे ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ होने चाहिए, जिससे लोगों को समय रहते खतरे की जानकारी मिल सके और वे सुरक्षित जगहों पर पहुंच सकें। ऐसी चेतावनी प्रणाली विकसित करने और लागू करने के लिए ही फंडिंग की जा रही थी। दुर्भाग्य से, जिन कार्यक्रमों की फंडिंग कम की गई, उनमें यही महत्वपूर्ण योजनाएं भी शामिल थीं।

–आईएएनएस

एवाई/पीएम

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IANS Agency

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