पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को ‘इवैक्यू प्रॉपर्टी ट्रस्ट बोर्ड’ (ईपीटीबी) को आदेश दिया कि एक सदी पुराने उस हिंदू मंदिर का पुनर्निर्माण प्रारंभ करें, जिसे पिछले हफ्ते खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में भीड़ ने तोड़ दिया था और उसमें आग लगा दी थी। न्यायालय ने कहा कि इस हमले से देश को ‘‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी’’ उठानी पड़ रही है।
‘डॉन’ अखबार ने खबर दी कि उच्चतम न्यायालय ने हमले का संज्ञान लिया था और स्थानीय अधिकारियों को पांच जनवरी को अदालत में पेश होने के आदेश दिए थे। न्यायालय ने बोर्ड को निर्देश दिया कि पाकिस्तान में ऐसे सभी मंदिरों एवं गुरुद्वारों का ब्यौरा अदालत को सौंपे जो चालू या बंद हैं।
खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले के टेरी गांव में बुधवार को मंदिर पर कट्टरपंथी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी (फजल उर रहमान समूह) के सदस्यों द्वारा हमले की मानवाधिकार समूहों एवं अल्पसंख्यक हिंदू नेताओं ने कड़ी निंदा की है।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश गुलजार अहमद की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने ईपीटीबी को निर्देश दिया कि देश भर के मंदिरों में अतिक्रमण को हटाएं और अतिक्रमण में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें। न्यायमूर्ति अहमद ने कहा कि करक की घटना ने ‘‘पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदा’’ किया है। ईपीटीबी एक स्वायत्तशासी बोर्ड है जो विभाजन के बाद भारत चले गए हिंदुओं और सिखों की धार्मिक संपत्तियों और मंदिरों एवं गुरुद्वारों का प्रबंधन करता है।


Download Android App
Download iOS App



