नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान ने हालिया संघर्ष विराम प्रस्तावों पर अपनी स्थिति और मांगें स्पष्ट कर दी हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान ने अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर शर्तें तैयार कर ली हैं।
मीडिया ब्रीफिंग में बघाई ने स्पष्ट किया कि “अल्टीमेटम और युद्ध अपराधों की धमकियों के साथ बातचीत एक-दूसरे के साथ मेल नहीं खाती हैं।” उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी प्रकार के दबाव में आकर वार्ता नहीं करेगा और उसकी प्राथमिकता अपने रणनीतिक हितों की रक्षा करना है।
प्रवक्ता ने यह भी बताया कि अमेरिका की ओर से पहले पेश की गई तथाकथित “15 सूत्रीय योजना” को ईरान ने खारिज कर दिया है, क्योंकि वह उसकी नजर में “बहुत ज्यादा और असंतुलित थी।” संयुक्त राज्य अमेरिका की इन मांगों को तेहरान ने अपने हितों के खिलाफ बताया है।
बघाई ने कहा, “ईरान अपने वैध अधिकारों और मांगों को स्पष्ट रूप से रखने में हिचकिचाता नहीं है। इसे किसी तरह की नरमी या समझौते के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह अपने रुख के प्रति उसके आत्मविश्वास को दर्शाता है।”
ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप की उन धमकियों की सख्त निंदा की, जिनमें उन्होंने उसके बिजली घर और पुल जैसे बुनियादी ढांचों पर हमला करने की बात कही है। बघाई ने इसे “युद्ध अपराध” बताया। उन्होंने कहा, “इस तरह की धमकियां अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं। किसी देश की बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना गलत है।” चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर कोई दूसरा देश अमेरिका का साथ देकर ऐसे हमलों में मदद करता है, तो उसे भी जिम्मेदार माना जाएगा।
ईरान पर बढ़ते हमलों के बारे में अमेरिकी अधिकारियों की टिप्पणियों और साथ ही बातचीत पर चर्चा करने के जवाब में, बघाई ने कहा कि पिछले एक साल में अमेरिका द्वारा उठाए गए कदमों ने कूटनीति के प्रति उसकी विश्वसनीयता को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। उन्होंने अमेरिका पर विश्वासघात और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
–आईएएनएस
केआर/
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