नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने का सिलसिला 2026 में भी जारी रहा। नई रिपोर्ट एक भयावह तस्वीर पेश करती है। जिसके मुताबिक, इस साल के पहले आठ महीनों में देश के ग्लेशियर्स ने अपने 5.5 प्रतिशत बर्फीले आयतन को खो दिया। इसके साथ ही 2021 से अब तक महज पांच वर्षों में स्विस ग्लेशियरों की कुल बर्फ का 19.4 प्रतिशत हिस्सा खत्म हो चुका है।
स्विस ग्लेशियर मॉनिटरिंग नेटवर्क (ग्लैमॉस) और स्विस कमीशन फॉर क्रायोस्फीयर ऑब्जर्वेशन की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में ग्लेशियरों की औसत मोटाई में करीब 2.5 से 4 मीटर तक की कमी दर्ज की गई। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कई ग्लेशियर अब केवल सतह से पिघल नहीं रहे, बल्कि उनके भीतर पानी के प्रवाह से बर्फ के अंदर सुरंगें और बड़े खाली हिस्से बन रहे हैं, जिससे ग्लेशियर अंदर से कमजोर होकर टूट रहे हैं।
ईटीएच ज्यूरिख के ग्लेशियर वैज्ञानिक और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक मैथियास हुस के मुताबिक, कई जगहों पर कुछ साल पहले तक जहां सैकड़ों मीटर मोटी बर्फ थी, वहां अब चट्टानों से भरा ऐसा भू-दृश्य दिखाई दे रहा है जो चंद्रमा की सतह जैसा नजर आता है।
इस बदलाव के पीछे 2026 की भीषण गर्मी और सर्दियों में कम बर्फबारी को प्रमुख कारण बताया गया है। अप्रैल से सितंबर तक का छह महीने का समय स्विट्जरलैंड में 1864 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से सबसे गर्म और सबसे सूखा रहा। यूरोप की गर्मी वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ रही है और वैज्ञानिक इसका संबंध जीवाश्म ईंधन से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से जोड़ते हैं।
हालांकि 2026 में बर्फ का नुकसान 2022 के रिकॉर्ड स्तर से थोड़ा कम रहा। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार सहारा की धूल का जमाव अपेक्षाकृत कम रहा और सर्दियों के अंत में बर्फ की मात्रा थोड़ी अधिक थी। सहारा की धूल बर्फ की सतह को गहरा कर देती है, जिससे वह कम सूर्यप्रकाश परावर्तित करती है और अधिक गर्मी सोखती है।
स्विट्जरलैंड का प्लाटालवाफिर्न या ग्रीस ग्लेशियर इस बदलाव का एक खास उदाहरण है। इसने केवल दो दशकों में अपने क्षेत्रफल का करीब 99 प्रतिशत हिस्सा खो दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अब ग्लेशियरों के पिघलने की गति सामान्य पीछे हटने से आगे बढ़कर उनके तेजी से विघटन में बदल रही है।
ग्लेशियरों से निकलने वाला पानी फिलहाल गर्मियों में जल संकट को कुछ हद तक कम करता है। 2026 में जुलाई से सितंबर के बीच स्विस ग्लेशियरों से अनुमानित 2.2 ट्रिलियन लीटर पानी निकला, जो स्विट्जरलैंड के घरों की सालाना पेयजल खपत के चार गुने से अधिक है। लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्लेशियरों का आकार लगातार घटने के साथ भविष्य में यह प्राकृतिक जल-सहारा भी कमजोर होता जाएगा।
यह संकट केवल स्विट्जरलैंड तक सीमित नहीं है। यूरोप के आल्प्स क्षेत्र में ग्लेशियरों का तेजी से सिकुड़ना पानी की उपलब्धता, जलविद्युत, पारिस्थितिकी और पर्यटन पर असर डाल सकता है। यूरोप में 1997 के बाद से लंबे समय से निगरानी किए जा रहे ग्लेशियरों ने बड़े पैमाने पर बर्फ खोई है।
–आईएएनएस
केआर/
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



