मैथिली ठाकुर की कौन सी बात का जवाब नहीं दे पाए थे BJP के ये वरिष्ठ नेता? जो अब कैबिनेट से कट गया पत्ता

Summary :

Mangal Pandey Out of Bihar Cabinet: बिहार सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार हो गया है। इस दौरान कुल 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। इस नई कैबिनेट में अलग-अलग दलों को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जिसमें बीजेपी और जेडीयू की भूमिका सबसे प्रमुख रही। नई सरकार में बीजेपी कोटे से 15 मंत्रियों को शामिल किया गया है, जबकि जेडीयू के 13 नेता मंत्री बने हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसके अलावा चिराग पासवान की पार्टी से दो नेताओं को जगह मिली है। वहीं, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से एक-एक…

Mangal Pandey Out of Bihar Cabinet: बिहार सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार हो गया है। इस दौरान कुल 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। इस नई कैबिनेट में अलग-अलग दलों को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जिसमें बीजेपी और जेडीयू की भूमिका सबसे प्रमुख रही। नई सरकार में बीजेपी कोटे से 15 मंत्रियों को शामिल किया गया है, जबकि जेडीयू के 13 नेता मंत्री बने हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसके अलावा चिराग पासवान की पार्टी से दो नेताओं को जगह मिली है। वहीं, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से एक-एक मंत्री को कैबिनेट में शामिल किया गया है। इस तरह गठबंधन के सभी प्रमुख सहयोगियों को संतुलित तरीके से प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है।

Mangal Pandey Out of Bihar Cabinet: पुराने चेहरों को मिला मौका, कुछ दिग्गज बाहर

सम्राट चौधरी की कैबिनेट में ज्यादातर वे ही चेहरे शामिल किए गए हैं जो पहले नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री रह चुके थे। हालांकि, इस बार कुछ बड़े नेताओं को जगह नहीं मिल पाई। खासकर बीजेपी के वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया, जो एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। इसके अलावा बीजेपी के दो और पुराने मंत्री—नारायण प्रसाद और सुरेंद्र मेहता—को भी कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया।

मंगल पांडेय का राजनीतिक सफर

मंगल पांडेय बिहार बीजेपी के एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। वह सीवान से विधायक हैं और कई सालों तक राज्य सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। 2017 से 2022 तक उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के रूप में काम किया और इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी उनके पास रही। इसके बाद 2024 से 2025 के बीच वह दोबारा मंत्री बने और इस बार उन्हें स्वास्थ्य के साथ-साथ कृषि विभाग भी सौंपा गया। 2025 में एनडीए सरकार बनने के बाद भी उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय दिया गया था, लेकिन इस बार नई कैबिनेट में उन्हें जगह नहीं मिली।

विधानसभा में उठा अस्पतालों की बदहाली का मुद्दा

मंगल पांडेय के कार्यकाल के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठे थे। 2025 में विधानसभा चुनाव जीतकर आईं बीजेपी विधायक और लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने अपने क्षेत्र के अस्पतालों की खराब स्थिति का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। उन्होंने सदन में कहा था कि अस्पताल की इमारत बेहद जर्जर हालत में है और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने बताया कि छत से प्लास्टर गिर रहा है, दीवारों में दरारें हैं और बारिश के समय पानी टपकता है, जिससे मरीजों की जान को खतरा बना रहता है। उनका सवाल था कि जब सरकार हर साल स्वास्थ्य बजट बढ़ा रही है, तो अस्पतालों की हालत में सुधार क्यों नहीं हो रहा।

मंत्री के जवाब से असंतोष

इस मुद्दे पर जवाब देते हुए तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा था कि सरकार अस्पतालों की स्थिति को लेकर गंभीर है और कई जगहों पर नई इमारतों की मंजूरी दी जा चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ स्थानों पर निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन मैथिली ठाकुर इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुईं। उन्होंने सदन में ही दोबारा हस्तक्षेप करते हुए कहा कि उनके क्षेत्र का अस्पताल वर्षों से सूची में शामिल है, लेकिन न तो उसकी मरम्मत हुई और न ही नई बिल्डिंग का काम शुरू हुआ। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कागजों पर सब कुछ ठीक दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।

सदन में गरमाया माहौल

मैथिली ठाकुर के लगातार सवालों के चलते विधानसभा का माहौल कुछ समय के लिए गरमा गया था। उन्होंने कहा कि हर साल योजनाओं की घोषणा होती है, लेकिन धरातल पर कोई बदलाव नहीं दिखता। मरीजों और उनके परिजनों को डर के बीच इलाज कराना पड़ता है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। इन घटनाओं के कुछ ही महीनों बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ और नई सरकार का गठन हुआ।

सम्राट चौधरी के नेतृत्व में जब मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया, तो मंगल पांडेय को उसमें शामिल नहीं किया गया। इसे राजनीतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है। नई कैबिनेट में सिर्फ मंगल पांडेय ही नहीं, बल्कि दो अन्य पूर्व मंत्रियों को भी जगह नहीं मिली। नारायण प्रसाद, जो पहले आपदा प्रबंधन और पर्यटन विभाग संभाल चुके हैं, इस बार बाहर हो गए। वहीं सुरेंद्र मेहता, जो पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री थे, उन्हें भी नई टीम में शामिल नहीं किया गया।

यह भी पढ़ें: Nishant Kumar के साथ शपथ लेते ही चर्चा में Shweta Gupta! जानिए कौन हैं बिहार की नई मंत्री और कितनी हैं इनकी संपत्ति?

Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।