Nalanda के शीतला मंदिर भगदड़ मामले में 4 पुजारी गिरफ्तार, अवैध वसूली और कुप्रबंधन का आरोप, CCTV फुटेज से हुआ खुलासा

Nalanda Temple Stampede Case Update

Nalanda Temple Stampede Case Update: बिहार में नालंदा के मघड़ा शीतला मंदिर हादसे के मामले में जांच जारी है। इस मामले में 4 पुजारियों को गिरफ्तार भी किया है। इन पुजारियों पर पैसे लेकर पूजा करवाने और महिलाओं पर डंडे चलाने का आरोप लगा है। दीपनगर थाने की दारोगा मौसमी कुमारी के बयान पर FIR दर्ज की गई। इसमें 20 लोगों पर केस दर्ज हुआ है। नामजदों में 18 पंडा समाज के लोग और उनके दो सहयोगी शामिल हैं। इस बीच भगदड़ के दौरान का सीसीटीवी फुटेज भी आ गया है। इसमें खुलासा हुआ है कि भीड़ को कंट्रोल करने के बजाय श्रद्धालुओं के साथ मारपीट की गई।

Nalanda Temple Stampede: मंदिर में अवैध वसूली का आरोप

Nalanda Temple Stampede
Nalanda Temple Stampede (Source: Social Media)

जानकारी के अनुसार, दीपनगर ठन की पुलिस अधिकारी मौसमी कुमारी के लिखित आवेदन के आधार पर मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत 20 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि मंदिर समिति ने मेला या भीड़ प्रबंधन कि कोई भी सूचना पुलिस को नहीं दी थी। गर्भगृह के पास जानबूझकर रुकावट बनाई गई, ताकि लोगों से अवैध पैसे वसूले जा सकें।

Nalanda Temple Stampede Case Update: क्या है पूरा मामला?

Nalanda Temple Stampede Case Update
Nalanda Temple Stampede Case Update (Source: Social Media)

मंगलवार, 31 मार्च को बिहार के नालंदा ज़िले में स्थित शीतला माता मंदिर में धार्मिक सभा के दौरान अचानक भगदड़ मच गई। इस दौरान आठ महिलाओं की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। यह घटना ऐसे समय पर हुई जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए जमा हुए थे, वहां भारी मात्रा में भीड़ जमा थी, तभी अचानक भगदड़ मची और इसमें कई लोग कुचले गए। बिहार सरकार ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार ने मृतकों के परिवार को 6-6 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान भी किया था।

चश्मदीदों ने क्या बताया?

चश्मदीदों ने बताया कि हर मंगलवार को मंदिर में भारी भीड़ आती है, जिसमें पटना समेत राज्य के कई इलाकों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कई लोगों ने इस हादसे के लिए कुप्रबंधन को भी ज़िम्मेदार ठहराया है।

एक अन्य चश्मदीद ने बताया कि ये घटना कुप्रबंधन की वजह से हुई है। जबकि दूसरे शख्स ने कहा कि कोई भी लाइन में नहीं खड़ा होना चाहता था और हर कोई सबसे पहले दर्शन करना चाहता था। चैत्र महीने का आखिरी मंगलवार होने के कारण भीड़ और भी ज़्यादा थी।”

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